फोकट की सैलरी पर पड़ा चाबुक : रतलाम में बिना स्कूल गए ऑनलाइन हाजिरी लगाने वाली शिक्षिका पर गिरी गाज
⚫ कामचोरी की सजा भुगतना पड़ी वर्षा राठौर को
⚫ फर्जी उपस्थिति चमकाने वाले के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख
⚫ शिक्षा विभाग में हड़कंप
हरमुद्दा
रतलाम, 1 सितंबर। सरकार से मुफ़्त का वेतन उठाने और बिना कर्तव्य निभाए कागजों पर उपस्थिति चमकाने वाले शिक्षकों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। रतलाम जिले के पिपलौदा विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय बोरतलाई की प्रभारी प्रधान अध्यापक एवं प्राथमिक शिक्षक श्रीमती वर्षा राठौर को अपनी लापरवाही और कामचोरी की भारी कीमत चुकानी पड़ी है।
जनविश्वास अभियान के तहत प्राप्त शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी द्वारा की गई कार्रवाई में शिक्षिका की आगामी एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है।
शिक्षक ऐप का misuse: घर बैठे लग रही थी हाजिरी
जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शिक्षिका नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं होती थीं। हालांकि, डिजिटल व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए 'शिक्षक ऐप' के माध्यम से लगातार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई जा रही थी। यानी बिना स्कूल पहुंचे ही सरकारी तिजोरी से नियमित वेतन उठाया जा रहा था।
स्पष्टीकरण निकला खोखला, नियम 10 (चार) के तहत हुई कार्रवाई
मामला उजागर होने पर जब शिक्षिका से जवाब-तलब किया गया, तो प्रस्तुत स्पष्टीकरण बेहद असंतोषजनक और गैर-जिम्मेदाराना पाया गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-10 (चार) के तहत लघुशास्ति (Minor Penalty) का दंड सुनाते हुए वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए।
कामचोर कर्मचारियों को सख्त संदेश
यह कार्रवाई उन सभी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए एक सीधा चेतावनी संदेश है जो तकनीक और व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर "फोकट की सैलरी" वसूलने की फितरत रखते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी ही।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
जनविश्वास अभियान के तहत हुई इस त्वरित कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
Hemant Bhatt