कला सरोकार : आस्था की राह पर कला का अद्भुत सृजन
⚫ 70 वर्षीय गोपाल माहेश्वरी ने पेश की कला और भक्ति की मिसाल
⚫1000 से अधिक आकृतियों से साकार की श्रीकृष्ण की संपूर्ण जीवन लीला
⚫ रत्नेश विजयवर्गीय
रतलाम, 5 सितंबर। कला केवल रूप या रंग की मोहताज नहीं होती, जब उसमें निष्ठा, साधना और समर्पण का समावेश हो जाए तो वह अमर कृति बन जाती है। रतलाम के जवाहर नगर निवासी 70 वर्षीय गोपाल माहेश्वरी ने अपनी अनूठी कलात्मक क्षमता और अटूट ईश्वर-भक्ति के बल पर इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है। उनके द्वारा निर्मित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हस्तनिर्मित झांकी आज न केवल रतलाम, बल्कि पूरे क्षेत्र में कला और भक्ति के अनूठे संगम का प्रतीक बनकर उभरी है।

इस विशाल और जीवंत झांकी की प्रमुख कलात्मक विशेषताएं

⚫ 1000 से अधिक हस्तनिर्मित आकृतियां: झांकी में कान्हा के जन्म से लेकर बाल लीलाओं, गोवर्धन धारण और कंस वध तक के संपूर्ण जीवन चक्र को 1000 से अधिक बारीक आकृतियों के माध्यम से सजीवता से उकेरा गया है।
⚫ पूर्णतः स्वदेशी एवं स्वरचित कला: पात्रों के वस्त्रों की सिलाई, मुकुट, आभूषण, श्रृंगार सामग्री और डिजाइनिंग का हर एक सूक्ष्म कार्य श्री माहेश्वरी ने स्वयं अपने हाथों से तैयार किया है।
⚫ 3 माह का निरंतर कला-साधना अभ्यास: 70 वर्ष की आयु में भी निरंतर 3 महीने तक अथक परिश्रम कर उन्होंने हर बारीकी को निधारा है।

साधारण शुरुआत से कलात्मक शिखर तक का सफर
श्री माहेश्वरी की कला यात्रा की शुरुआत 7-8 वर्ष पूर्व छोटे-छोटे नंद भवन और गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृतियां बनाने से हुई थी। लॉकडाउन के दौरान मिले समय को उन्होंने अपनी कला को तराशने और प्रभु सेवा में समर्पित करने का माध्यम बनाया। श्रीकृष्ण की पोशाकें सिलने से शुरू हुआ यह हुनर आज एक विशाल झांकी के रूप में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पारिवारिक प्रोत्साहन और कला का सम्मान
कला जब अपनों के सहयोग से सींची जाती है, तो उसकी चमक दोगुनी हो जाती है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत चार्टर्ड अकाउंटेंट पुत्र, जीवनसंगिनी मंजुला माहेश्वरी एवं पूरे परिवार के संबल ने उनके इस हुनर को नई ऊर्जा दी है।
कला जगत और समाज के लिए गोपाल माहेश्वरी की यह झांकी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि उम्र कभी भी रचनात्मकता के आड़े नहीं आती। उनकी यह साधना युवा पीढ़ी के लिए अपनी लोक कलाओं, हस्तशिल्प और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने की एक सशक्त प्रेरणा है।
Hemant Bhatt