विचार सरोकार : अक्षर से आकार तक, शिक्षक राधाकृष्णन और राष्ट्र-निर्माण की गाथा
डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा-दर्शन का मूल उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना था। उनके दर्शन के मुख्य बिंदु को देखे तो मूल्य आधारित शिक्षा-वे मानते थे कि बिना नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के शिक्षा अधूरी है।
⚫ उमा त्रिवेदी
भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और अद्वितीय शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि "शिक्षा केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं,बल्कि चरित्र निर्माण और मानव आत्मा का परिष्कार है।" उनके अनुसार एक सच्चा *शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकें नहीं पढ़ाता,बल्कि वह विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों, चिंतन शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व का बीजारोपण करता है। इसी दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'शिक्षक से राष्ट्रनिर्माता' के रूप में देखा जाता है।

डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा-दर्शन का मूल उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना था। उनके दर्शन के मुख्य बिंदु को देखे तो मूल्य आधारित शिक्षा-वे मानते थे कि बिना नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के शिक्षा अधूरी है। यदि ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए न हो,तो वह विनाशकारी बन सकता है।
भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का संगम- उन्होंने पूर्वी अध्यात्म और पश्चिमी विज्ञान और तर्कसंगतता के संतुलन पर बल दिया। उनके अनुसार शिक्षा को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक ज्ञान को अपनाना चाहिए।
शिक्षक की केंद्रीय भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है डॉ. राधाकृष्णन का दृढ़ विश्वास था कि देश के सबसे उत्कृष्ट दिमागों को ही शिक्षक बनना चाहिए। एक समर्पित शिक्षक ही युवाओं के विचारों को सही दिशा देकर राष्ट्र के भविष्य को आकार दे सकता है।इसी के साथ
चरित्र निर्माण और आत्म-साक्षात्कार शिक्षा का अंतिम लक्ष्य व्यक्ति को आत्म-निरीक्षण करने में सक्षम बनाना और उसमें सहिष्णुता,शांति तथा भ्रातृत्व भाव जगाना है।
राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर जोर देते हुए डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि किसी भी देश का निर्माण केवल ईंट-पत्थर या कारखानों से नहीं होता, बल्कि वहाँ के नागरिकों के चरित्र और विचार से होता है। जब एक शिक्षक विद्यार्थियों में ईमानदारी, नागरिक कर्तव्य और मानवता का भाव जगाता है, तब वह अप्रत्यक्ष रूप से एक सशक्त राष्ट्र की नीव रख रहा होता है।
इसी अद्वितीय योगदान को सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिवस (5 सितंबर) को पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का जीवन और उनका शिक्षा-दर्शन आज भी हमें यह याद दिलाता है कि एक सुशिक्षित,नैतिक और चरित्रवान पीढ़ी का निर्माण ही वास्तव में राष्ट्र निर्माण की सच्ची राह है।

⚫ उमा त्रिवेदी
Hemant Bhatt