साहित्य सरोकार : संघर्षों के बीच सृजन ही मनुष्यता की पहचान
⚫ डॉ. धर्मराज वाघेला ने कहा
⚫ जनवादी लेखक संघ के आयोजन में दो पुस्तकों का विमोचन
हरमुद्दा
रतलाम, 9 अगस्त। संघर्षों के बीच सृजन करना मनुष्य की पहचान है। हर रचनाकार के समक्ष हर समय संघर्ष की परिस्थितियों बनी रही। वैज्ञानिक आधार पर समझें तो प्रत्येक पार्टिकल का एंटीपार्टिकल मौजूद रहता है । समाज में भी अच्छाईयां और बुराइयां सब रहेगी । इनके बीच संघर्ष हमेशा चलता रहेगा । एक रचनाकार का यह दायित्व है कि वह अपने सृजन के माध्यम से समाज को अच्छाइयों की तरफ अग्रसर करे और मनुष्य की उम्मीदों को ख़त्म न होने दे।

यह विचार पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद डॉ. धर्मराज वाघेला ने जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में व्यक्त किए । उन्होंने वरिष्ठ रचनाकार प्रो. रतन चौहान की पुस्तक ' रात अंधेरी है ' और आशीष दशोत्तर के कविता संग्रह ' अकेले नहीं होता सब कुछ' का विमोचन करते हुए कहा कि रतलाम में सृजन का एक सकारात्मक वातावरण बना हुआ है । यह वातावरण इस बात को रेखांकित करता है कि यहां के रचनाकार समय के साथ चलते हुए मनुष्यता के पक्ष में खड़े हैं । अपनी रचनाओं के ज़रिए नई पीढ़ी को प्रेरित भी कर रहे हैं ।
रचना का दस्तावेजीकरण जरूरी
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि श्याम माहेश्वरी, पर्यावरणविद डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित एवं डॉ. स्वर्णलता ठन्ना ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। प्रो. रतन चौहान ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी रचा गया है उसका दस्तावेजीकरण होना ज़रूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी को यह ज्ञात हो सके कि उनके पूर्व के समय में क्या कुछ रचा गया है । यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी भी है कि हम अगली पीढ़ी को वह सब सौंपें जो कुछ हमने अपनी कोशिशों से अर्जित किया है। युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर ने इस अवसर पर कहा कि किसी भी रचनाकार को उसका परिवेश निर्मित करता है । जब तक साहित्यिक वातावरण, साहित्यिक रचनाधर्मियों का सकारात्मक सहयोग नहीं मिलता है, तब तक कोई भी रचनाकार अपनी अभिव्यक्ति नहीं कर पाता है । यह रतलाम की प्रकृति है कि वह हर रचनाकार को एक वातावरण उपलब्ध कराता है।
सीमाएं नहीं होती सृजन की
वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि सृजन की सीमाएं नहीं होती । उम्र का कोई बंधन नहीं होता। सृजनशील व्यक्ति सदैव समाज को अपनी नई कृतियां प्रदान करता है । इसी से किसी शहर की पहचान होती है। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष यूसुफ़ जावेदी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय में रचनाशीलता को कायम रखना बहुत ज़रूरी है । हमारे साथियों की सृजनशीलता इस बात को साबित करती है कि अच्छाइयां कभी ख़त्म नहीं होती और अच्छाइयों को सदैव पसंद किया जाता है । इस अवसर पर विनोद झालानी , रणजीत सिंह राठौर, सिद्धीक़ रतलामी, पूजा चोपड़ा ने भी विचार व्यक्त किए।
दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
समारोह में अतिथियों ने दो पुस्तकों का विमोचन किया। प्रो. रतन चौहान की नवीनतम पुस्तक 'रात अंधेरी है' और आशीष दशोत्तर के कविता संग्रह 'अकेले नहीं होता कुछ भी ' का विमोचन किया गया । दोनों रचनाकारों का शाल, पुष्पगुच्छ से सम्मान भी किया गया।
इनकी रही उपस्थिति

आयोजन में डॉ. एन. के . शाह , ओम प्रकाश मिश्रा, प्रणयेश जैन, दिनेश शर्मा,इंदु सिन्हा , पुष्पलता शर्मा , आशा श्रीवास्तव , नीता गुप्ता, पूजा चोपड़ा, सरिता दशोत्तर , गीता राठौर , छवि नीलिमा सिंह , कला डामोर , रचना चंद्रावत, दिलीप जोशी, कैलाश वशिष्ठ, कीर्ति शर्मा , पद्माकर पागे , अनीस ख़ान , प्रदीप जैन , नरेंद्र सिंह पंवार , जवेरीलाल गोयल , प्रकाश हेमावत , सुभाष यादव, श्याम सुंदर भाटी , जितेंद्र सिंह पथिक, हीरालाल खराड़ी , नरेन्द्र सिंह डोडिया, जितेन्द्र अग्रवाल, एस.एन. सोढ़ा, एस.के.मिश्रा सहित सुधिजन मौजूद थे। संचालन यूसुफ़ जावेदी ने किया और आभार रणजीत सिंह राठौर ने व्यक्त किया।
तरही मुशायरा आयोजन 19 अगस्त को
जनवादी लेखक संघ उर्दू विंग के प्रदेश संयोजक सिद्धीक़ रतलामी में बताया कि 19 अगस्त को प्रातः 11 बजे शहीद भगत सिंह पुस्तकालय शहर सराय रतलाम पर तरही मुशायरे का आयोजन किया जाएगा । इसमें रतलाम और आसपास के कवि, शायर दिए गए मिसरे ' फूलों की रहगुज़र पे चलो देखभाल के ' पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे । उन्होंने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।
Hemant Bhatt