पुस्तक समीक्षा : 'हक़' से पढ़ी जाएगी 'हक़'
सीधी सच्ची भाषा में कही कविताएं सत्य के दर्शन भी करवाती है। प्रश्न भी पूछती हैं। दीवारें, उजाला, सपने, बदला स्वरूप, संवाद बनाएं रखिए। हरेक कविता जीवन के अर्थ बताती है। "हक़" कविता में सभी व्यक्तियों का दर्द है फिर चाहे वो पत्नी हो या पति।
⚫ इन्दु सिन्हा "इन्दु"
पिछले दिनों रतलाम शहर के वरिष्ठ लेखक संजय परसाई "सरल" का काव्य संग्रह "हक़" प्राप्त हुआ। "हक़" में छोटी बड़ीकुल अट्ठावन कविताएं शामिल हैं। मेरा मानना है हम जिस भाषा में ख्वाब देखते हैं जिस भाषा में कल्पना करते हैं उसी भाषा में लिखते भी हैं। कविताओं में आनंद होना चाहिए और आनंद जीवन की छोटी-छोटी बातों से आता है।

भाषा सिर्फ भाषा नहीं होती शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते। पूरा जीवन इनमें समाया होता है। जीवन "हक़" में समाया हुआ है। 'साँसों की कीमत' से लेकर रतलामी संस्कृति' तक जीवन के रंग-बिरंगे अलग-अलग चित्र बिखरे पड़े हैं काव्य संग्रह में। कई कविताएं संजय जी के जीवन में आए व्यक्तियों से या उनके द्वारा सुनी गई पंक्तियों से प्रेरित है। जिसका जिक्र उन्होंने कविता के अंत में किया है।
सीधी सच्ची भाषा में कविता सत्य का दर्शन करवाती
उजाला में अंधेरे को भगाने की बात है तो कहीं 'माँ' में कवि माँ की यादों में रच बस गया है। रिश्तो के धागे में रिश्तों की नाजुकता दिखती है। 'मृत्यु भोज' में मुझे मेरी लघु कथा (राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित) मज़ा आ गया" याद आ गई। इस लघुकथा में मेरा भी व्यक्तिगत अनुभव था। रूढ़ियों और परम्पराओं का विरोध खुद से और घर से होना चाहिए। ये मायने रखता है। सभी कविताओं में जीवन के संगीत को सुना जा सकता है। महसूस किया जा सकता है। सीधी सच्ची भाषा में कही कविताएं सत्य के दर्शन भी करवाती है। प्रश्न भी पूछती हैं। दीवारें, उजाला, सपने, बदला स्वरूप, संवाद बनाएं रखिए। हरेक कविता जीवन के अर्थ बताती है। "हक़" कविता में सभी व्यक्तियों का दर्द है फिर चाहे वो पत्नी हो या पति।
साहित्यकार आशीष दशोत्तर के प्रेरणादायी शब्द रूपी फुल काव्य संग्रह में खुशबू की तरह बिखरे
"सरल" जी वाकई "सरल" स्वभाव के हैं। स्थानीय आयोजनों में सरल जी की सशक्त उपस्थिति रहती है। अनेकों सम्मानों से सम्मानित सरल जी भविष्य में कुछ नया सृजन अवश्य करेंगे।
भावुकता संवेदनशीलता कविताओं में है। भाषा सरल है। शहर के साहित्यकार आशीष दशोत्तर के प्रेरणादायी शब्द रूपी फूल काव्य संग्रह में खुशबू की तरह बिखरे हैं।

'इंक पब्लिकेशन प्रयागराज द्वारा ये पुस्तक पठनीय है। पुस्तक का मूल्य दो सौ रुपये है। निश्चित ही साहित्य जगत में "हक़"। "हक़"से पढ़ी जाएगी।

⚫ इन्दु सिन्हा "इन्दु", कहानीकार, रतलाम (मध्यप्रदेश)
Hemant Bhatt