साहित्य रचना : वो क्या है?

बस डूबती ही जा रही है लता उसमें, वो झील है, समंदर है, दरिया है, क्या है?

साहित्य रचना : वो क्या है?

रंजनालता

रूह तक को भी छू गया वो मेरे,
वो खुशबू है, चांदनी है, दुआ है, क्या है?

जिंदगी में भर दी रौशनी उसने,
वह प्रभा है, जुगनू है, दीया है क्या है?

बिन मांगे मिली है चाहत उसकी,
वो इश्क है, जुनूं है, वफा है, क्या है?

वह कहता नहीं बस दिए जाता है,
वो शज़र है, धूप है, हवा है, क्या है?

महसूस होता है पर दिखता नहीं,
वो सांस है, धड़कन है, खुदा है, क्या है?

खुद को फ़ना कर पाया है उसे,
वो अरमां है, मंजिल है, रास्ता है क्या है?

भिंगोया है मेरे दिल की जमीं को,
वो शबनम है, कतरा है, बरखा है, क्या है?

उसकी बातें जैसे सरगम हो कोई,
वो गीत है, ग़ज़ल है, कविता है, क्या है?

आखिर क्यों इतनी मोहब्बत है उससे,
वो ख़्वाब है, ख़्वाहिश है, दुनिया है क्या है?

बस डूबती ही जा रही है लता उसमें,
वो झील है, समंदर है, दरिया है, क्या है?