साहित्य रचना : एक कविता लिखी है
बस तुम यूं ही समझ लेना, कोरे कागज़ को पढ़ लेना, पढ़ लेना तहरीर स्याही की, जो कुछ कहती बेजुबानी है, एक कविता लिखी है- जो तुमको सुनानी है।
⚫ रंजनालता
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है,
लिखा है कि-
क्या लिखूं.......

बस तुम यूं ही समझ लेना,
कोरे कागज़ को पढ़ लेना,
पढ़ लेना तहरीर स्याही की,
जो कुछ कहती बेजुबानी है,
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है।
लिखा है नयनों का नीर,
और हृदय की दुखती पीर,
तुम नयनों की भाषा पढ़ लेना,
इसकी भी एक कहानी है,
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है।
सुन लेना मेरे मन की बात,
सहे हैं कैसे-कैसे आघात,
तुम भी कभी कुछ लिख देना,
प्रीत की रीत जो निभानी है,
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है।
कहें भी तो फिर कैसे कहें,
सहें भी तो फिर कैसे सहें,
समझो तो आंखों में तूफान हैं,
न समझो तो फकत पानी है,
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है।
अंत में अपना नाम लिखा है,
गीत यूं ही तमाम लिखा है,
तुम भी इसे गुनगुना लेना,
जिंदगी नहीं लौटकर आनी है,
एक कविता लिखी है-
जो तुमको सुनानी है।

⚫ रंजनालता, समस्तीपुर
Hemant Bhatt