रतलाम में 41 वर्षों की परंपरा: अनंत चतुर्दशी पर जवाहर व्यायाम शाला की ऐतिहासिक परंपरा वैभव के साथ उतरेगी सड़क पर
⚫ शस्त्र कला और मलखंब का दिखेगा अकल्पनीय प्रदर्शन
⚫ विशाल चल समारोह, रोमांचक अखाड़ा प्रदर्शन, जीवंत झांकी
हरमुद्दा
रतलाम, 23 सितंबर। मालवा की माटी में कुश्ती और अखाड़ा परंपरा के अलंबरदार रहे जवाहर व्यायाम शाला के संस्थापक स्वर्गीय नारायण जी पहलवान द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक परंपरा इस वर्ष भी अपने पूरे वैभव के साथ शहर की सड़कों पर उतरेगी। विगत 41 वर्षों से अनवरत जारी इस परंपरा के तहत अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर जवाहर व्यायाम शाला द्वारा विशाल चल समारोह, रोमांचक अखाड़ा प्रदर्शन, जीवंत झांकी और मलखंब का अकल्पनीय प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

संस्थापक स्वर्गीय नारायण पहलवान
जवाहर व्यायाम शाला के सचिव राजीव रावत ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य आकर्षण शस्त्र कला का अद्भुत कौशल और मलखंब के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों द्वारा किए जाने वाले हैरतअंगेज करतब होंगे, जो रतलाम की धर्मप्रेमी जनता को मंत्रमुग्ध कर देंगे। लगभग 1 महीने से पहलवान अभ्यास में रत हैं।

हजारों पहलवानों का जत्था और व्यापक मार्गदर्शन
यह विशाल चल समारोह नगर के प्रमुख मार्गों से उत्साहपूर्वक निकाला जाएगा। इसमें हजारों की संख्या में पहलवान अनुशासित ढंग से शामिल होंगे। चल समारोह का आयोजन अखाड़े के संरक्षकों एवं संचालकों के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है।
⚫ संरक्षक: दौलत पहलवान, सुरेश जाट
⚫ संचालक: वैभव जाट (सन्नी पहलवान), गौरव जाट
शस्त्र कला और मलखंब भारत की प्राचीन योद्धा संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन

जवाहर व्यायाम शाला के इस विशाल चल समारोह में भारतीय पारंपरिक युद्ध कौशल और शारीरिक दक्षता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
सैकड़ों शस्त्रों की गूंज और करतब
अखाड़े के सैकड़ों पहलवान लाठी, फरसा, तलवारबाजी और विभिन्न पारंपरिक हथियारों से लैस होकर अपनी शस्त्र कला का प्रदर्शन करेंगे।
मलखंब पर शौर्य की कलाबाज़ियां
मलखंब के ख्याति प्राप्त और सिद्धहस्त खिलाड़ियों द्वारा खंभे पर संतुलन, गतिशीलता और शारीरिक शक्ति के ऐसे-ऐसे करतब दिखाए जाएंगे जिन्हें देखकर दर्शक दातों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे।
रक्तबीज संहार: झांकी में दिखेगा माँ कालिका का रौद्र रूप
जवाहर व्यायाम शाला द्वारा इस वर्ष तैयार की गई झांकी आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टि से बेहद खास है। इस बार माँ काली द्वारा असुर 'रक्तबीज' के वध के प्रसंग को सजीव रूप में दर्शाया गया है।
पौराणिक संदर्भ: असुर रक्तबीज को यह वरदान प्राप्त था कि उसके शरीर से जमीन पर गिरने वाली रक्त की हर एक बूंद से एक नया रक्तबीज उत्पन्न हो जाएगा। माँ कालिका ने अधर्म का नाश करने के लिए उसका संहार किया था। यही संदेश देती भव्य झांकी नगरवासियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।
भारी जन सैलाब उमड़ने की उम्मीद
रतलाम नगर की इस गौरवशाली परंपरा को देखने के लिए शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी जनसैलाब उमड़ने की उम्मीद है। जवाहर व्यायाम शाला ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से इस भव्य चल समारोह का साक्षी बनने की अपील की है।
Hemant Bhatt