माता बगलामुखी के दरबार में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम

माता बगलामुखी के दरबार में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम

⚫ देवी आराधना एवं भक्ति गीतों ने श्रोताओं को किया मंत्र मुक्त

⚫ नृत्य के माध्यम से देवी के विभिन्न रूपों और महिमा का जीवंत चित्रण

हरमुद्दा
​आगर-मालवा,15 अक्टूबर। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में नलखेड़ा के प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में एक भव्य 'शक्ति पर्व' का आयोजन किया गया। पीताम्बरा पीठ के रूप में विख्यात इस सिद्ध स्थल पर आयोजित इस सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया।

​आस्था और संस्कृति का भव्य मिलन

​माँ बगलामुखी की प्रांगण में आयोजित इस शक्ति पर्व ने धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में माँ भगवती के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। मंदिर परिसर की अलौकिक ऊर्जा और मंच पर प्रस्तुत हो रहे भक्ति गीतों ने संपूर्ण वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय बना दिया।

​मनमोहक प्रस्तुतियां और कलाकारों का जादू

​कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृति विभाग द्वारा आमंत्रित प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रस्तुतियों से हुई।

​लोक भक्ति गायन: भोपाल से आए मोक्ष बैण्ड के सुनील पाण्डेय और उनके साथी कलाकारों ने अपने ओजस्वी और मधुर स्वरों में पारंपरिक लोक भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

​माँ आदिशक्ति नृत्य नाटिका: भोपाल की प्रियंका जोशी एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत 'माँ आदिशक्ति' नृत्य नाटिका ने दर्शकों का मन मोह लिया। नृत्य के माध्यम से देवी के विभिन्न रूपों और महिमा का जीवंत चित्रण किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

​संध्या कालीन भक्ति गायन: भोपाल की ही भारती विश्वनाथन और उनके साथियों ने देवी आराधना पर आधारित एक से बढ़कर एक मनमोहक भजन प्रस्तुत किए। उनके सुरों ने ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु देर रात तक अपनी जगह पर डटे रहे।
​श्रद्धालुओं का उत्साह और सहभागिता

परिसर 'जय माता की' के जयकारों और करतल ध्वनि से गूंजा

​कार्यक्रम में आगर-मालवा जिले के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आमजन उपस्थित रहे। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत हर एक भजन और नृत्य नाटिका की समाप्ति पर पूरा मंदिर परिसर 'जय माता की' के जयकारों और करतल ध्वनि से गूंज उठा। 

कलाओं के माध्यम से हाजिरी लगाना आध्यात्मिक रूप से अत्यंत तृप्त करने वाला अनुभव

उपस्थित जनों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पावन नवरात्रों में माँ के दरबार में इन कलाओं के माध्यम से हाजिरी लगाना आध्यात्मिक रूप से अत्यंत तृप्त करने वाला अनुभव है।

​विशेष आकर्षण

माँ बगलामुखी के दरबार में शक्ति और साधना के इस पर्व ने नलखेड़ा की धार्मिक महत्ता को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया, जहां प्रशासन और संस्कृति विभाग के इस प्रयास से सनातन आस्था का यह पर्व एक यादगार उत्सव बन गया।