धर्म संस्कृति : हाथी पर सवार होकर आईं मां दुर्गा, शक्ति, भक्ति और आत्मसंयम का पर्व शुरू

धर्म संस्कृति : हाथी पर सवार होकर आईं मां दुर्गा, शक्ति, भक्ति और आत्मसंयम का पर्व शुरू

⚫ भक्ति और उल्लास के साथ शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ

⚫ श्री कालिका माता मंदिर में पूजन अर्चन के साथ गरबा रास आराधना शुरू

⚫ घर-घर में स्थापित हुईं महामाई

हरमुद्दा
​रतलाम, 11 अक्टूबर। धार्मिक भक्ति, अपार श्रद्धा और अनूठे उल्लास के वातावरण में रविवार से पावन शारदीय नवरात्रि पर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। ब्रह्म मुहूर्त में शहर के प्राचीन प्रसिद्ध श्री कालिका माता मंदिर में पूजन वचन के बाद गरबा रास आराधना शुरू हुई दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही। इस वर्ष जगत जननी मां दुर्गा का आगमन विशेष महत्व रखता है। माता रानी इस बार हाथी (गज) पर सवार होकर धरती पर पधारी हैं, जो देश में सुख, समृद्धि और अच्छी वर्षा का शुभ संकेत माना जाता है। वहीं, विजयादशमी मंगलवार को होने के कारण माता का प्रस्थान मुर्गे (चरणायुध) पर माना जा रहा है।

मां श्री कालिका

ज्योतिष आचार्य पंडित शैलेंद्र दुर्गा शंकर ओझा ने हरमुद्दा को बताया कि पंचांग के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर 2026 से हो गई। नवरात्रि का पहला दिन रविवार को है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी और 19 अक्तूबर को अष्टमी और नवमी से जुड़े प्रमुख अनुष्ठान होंगे। इसके अगले दिन यानी 20 अक्तूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

हाथी पर मां का आगमन समृद्धि का प्रतीक

हाथी को भारतीय परंपरा में शक्ति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से धार्मिक मान्यताओं में देवी का गज पर आगमन सुख-समृद्धि और अनुकूल परिस्थितियों का संकेत माना जाता है। कुछ परंपराओं में इसे अच्छी वर्षा और कृषि के लिए भी शुभ संकेत से जोड़ा गया है। 

​ब्रह्म मुहूर्त में गूंजे जयकारे, श्री कालिका माता मंदिर में शुरू हुआ गरबा रास

​ श्री कालिका माता मंदिर सभागृह में गरबा रास आराधना करती हुई महिलाएं

नवरात्रि के पहले दिन तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रसिद्ध श्री कालिका माता मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। परंपरागत एवं वैदिक रीति-रिवाज के साथ माता रानी की विशेष पूजा-अर्चना और आरती हुई। पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच घट-स्थापना की गई।
​पूजा के तुरंत बाद माता रानी की आराधना का महापर्व 'गरबा रास' परंपरा अनुसार प्रारंभ हुआ। ढोल-नगाड़ों की थाप और मैया के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर माता की भक्ति में लीन नजर आए।

​ मां श्री कालिका के प्रांगण में गरबा रास करती हुई महिलाएं

घर-घर बिराजीं महामाई: घट-स्थापना के साथ गूंजी अखंड ज्योत

​नवरात्रि के प्रथम दिन प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की पूजा का विधान निभाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक घर-घर में पूरे विधि-विधान और पवित्रता के साथ घट-स्थापना (कलश स्थापना) की गई। श्री कालिका माता मंदिर सहित अन्य शक्तिपीठ से दीप ज्योति लेकर श्रद्धालु अपने-अपने घर की ओर रवाना हुए।

​शुभ मुहूर्त में पूजन
 
श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों और पूजा मंडपों में वैदिक रीति से कलश स्थापित कर जौ (जवारे) बोए।

​अखंड ज्योति की स्थापना

सुख-शांति और समृद्धि की मनोकामना के साथ नौ दिनों के लिए अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई।

​बाजारों में रही हलचल: पूजा सामग्री, फल, फूल और माता के श्रृंगार के सामान की खरीदारी के लिए शनिवार रात को बाजारों में खासी चहल-पहल देखी गई।

​"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होगी। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कूष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी  नवरात्रि का मूल भाव शक्ति, भक्ति और आत्मसंयम से जुड़ा है। इसलिए इन नौ दिनों में पूजा-पाठ के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता पर भी ध्यान देने की परंपरा रही है।

अध्यात्म एवं उत्साह की बयार

नौ दिनों तक चलने वाले इस महाअनुष्ठान को लेकर हर ओर अध्यात्म और उत्साह की बयार बह रही है। संध्या होते ही शहर के विभिन्न पंडालों और मंदिरों में गरबा रास और महाआरती की धूम देखने को मिलेगी।

छाया : राकेश पोरवाल