मुद्दे की बात : टीईटी परीक्षा को लेकर शिक्षकों की एकजुटता के आगे बैकफुट पर सरकार
⚫ शासन ऊहापोह में
⚫ वीरेन्द्र त्रिवेदी एवं कैलाश परिहार
रतलाम/सैलाना, 10 अक्टूबर। सरकारी शिक्षकों के भारी संख्या बल के दबाव में टीईटी मामले में सरकार बैकफुट पर नजर आ रही हैं।एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शिक्षक समुदाय से सीधे सीधे पंगा लेने जैसी स्थिति निर्मित होने से प्रदेश में सरकार ऊहापोह की स्थिति में हैं।

शिक्षक संगठनों के भारी विरोध के चलते टीईटी मामले में फॉर्म भरने की और परीक्षा की तारीखें बढ़ाई जा रही हैं पर स्थिति ये हैं कि 5 प्रतिशत शिक्षक ही अब तक परीक्षा फॉर्म भरने की स्थिति में आए हैं,बाकी ने सरकारी आदेश में कोई रुचि ही नहीं दिखाई। आने वाला समय तय करेगा कि सरकार आखिर इस स्थिति से निपटती कैसे हैं? बहरहाल फिलहाल तो शिक्षकों की एकता ने नौकरी छीने जाने के उनके मन के भय को काफी कुछ कम किया हैं।
यूं शुरू हुआ मामला
दरअसल कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में उन सभी पहली से आठवीं तक के शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया जिनकी भर्ती 1998 से 2009 के बीच हुई थी।शिक्षा के अधिकार कानून का अक्षरशः पालन हो, इसके मद्देनजर कोर्ट ने ये आदेश दिया। आदेश के अनुसार जो शिक्षक ये परीक्षा पास नहीं कर सके उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।
फिर मचा हड़कंप
पूरे प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा हैं। रतलाम जिले में भी इस आदेश से 4 से 5 हजार शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। सब तरफ से जब विरोध के स्वर मुखर हुए तो सरकार को शिक्षकों के भारी दबाव में पुनर्विचार याचिका दायर करनी पड़ी। लेकिन फिर भी शीर्ष कोर्ट ने कोई खास रियायत नहीं दी। सिर्फ इतना किया कि 31 दिसम्बर 26 के बजाय 31 दिसम्बर 28 तक शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया। छूट सिर्फ उन्ही को रहेगी जिनकी नौकरी को सिर्फ 5 साल बाकी रहे हो।यानि उनकी उम्र अगस्त 26 में 57 की हो।
शासन की मनुहार भी काम नहीं आ रही
सरकार ने अंततः चार अवसर दे कर शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करने का ऐलान किया तो प्रदेश का शिक्षक समुदाय इस बात पर अड़ गया कि अब इस उम्र में कैसे परीक्षा दे। भोपाल में शिक्षक संगठनों ने आंदोलन शुरू कर दिए। संभागवार आंदोलन में शुक्रवार को आज उज्जैन संभाग के शिक्षकों ने भोपाल में धरना दिया।
तारीखें बढ़ रही, पर आवेदन में दिलचस्पी नहीं
लोक शिक्षण संचालनालय ने माध्यमिक शिक्षा मंडल को टीईटी परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी।पहले अवसर के लिए 12 अक्टूबर 26 को परीक्षा लेने का कार्यक्रम जारी कर आवेदन करने की तिथि 21 अगस्त से 4 सितम्बर तक करने के निर्देश दिए तो विरोध और तेज हो गया। शिक्षकों ने परीक्षा फॉर्म ही नहीं भरे।
चिंतित शासन ने आगे बढ़ाई तिथि
सरकार ने बाद में दिसम्बर में परीक्षा कार्यक्रम बना कर फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर की। इसका भी कोई खास रिस्पॉन्स नहीं आया।आंदोलन, प्रदर्शनों के बीच मुश्किल से 5 से 7 प्रतिशत शिक्षकों ने ही परीक्षा फॉर्म भरने में रुचि दिखाई तो अब फॉर्म भरने की तिथि को और आगे बढ़ाया जा कर 11 अक्टूबर कर दिया गया पर सामूहिक ताकत के बल पर शिक्षकों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और स्थिति जस की तस हैं।उधर एक पेंच और फस गया। लोक शिक्षण संचालनालय चाहता है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ये परीक्षा दिसम्बर से भी आगे खींचे।लेकिन दिसंबर के बाद अन्य परीक्षाओं का दबाव के चलते मंडल ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया।
अब क्या होगा, इस पर सबकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट बिना टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण किए शिक्षकों के सेवा में बने रहने के बिल्कुल पक्ष में नहीं, उधर सरकार मनुहार कर शिक्षकों की टीईटी परीक्षा कार्यक्रम तय कर रही इधर शिक्षक परीक्षा फॉर्म भरने को ही तैयार नहीं तो ये सवाल उठना लाजमी ही हैं कि आखिर अब क्या होगा?
जवाब देने से कतरा रहे अधिकारी
इस पेचीदा मामले का कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे रहा हैं। दरअसल सम्बंधित अधिकारियों के पास भी इसका कोई जवाब है ही नहीं।सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केन्द्र सरकार सिर्फ अध्यादेश के सहारे ही पलट सकती हैं। पर ये बहुत बड़े स्तर की बात हैं।क्या ऐसा होगा? इस पर सबकी निगाह लगी हैं।
Hemant Bhatt