त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के मायने, कहीं ख़ुशी कहीं ग़म का माहौल

उन शिक्षकों को हैं जो ये सोंच कर बैठे थे कि कार्यरत शिक्षकों को शायद सुप्रीम कोर्ट टीईटी की परीक्षा से मुक्ति ही दे दे। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।भले ही समय सीमा में इजाफा किया हो पर हर हाल में हर शिक्षक के लिए  टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी होगा ही।

त्वरित टिप्पणी : सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के मायने, कहीं ख़ुशी कहीं ग़म का माहौल

वीरेन्द्र त्रिवेदी

शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश कोई बहुत अधिक राहत भरा नहीं हैं।बस इतना ही हैं कि अब उन शिक्षकों को जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं,उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त समय मिल गया ये परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए।

टेंशन अभी भी बरकरार

ऐसा नहीं हैं कि ये आदेश कोई बहुत खुशी देने वाला हो।सुप्रीम कोर्ट अभी भी शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।कोर्ट ने अगस्त 2027 तक के बजाय अब उन शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अगस्त 2028 तक की समय सीमा बढ़ा कर अनिवार्य किया हैं।सिर्फ एक साल का समय बढ़ाना फौरी राहत ही हैं।

ये फायदा

दरअसल अब तैयारियों के लिए शिक्षकों को एक साल का अधिक समय मिल रहा हैं। वे ज्यादा समय ले कर तैयारी कर सकते हैं।दूसरा ये कि अगस्त 2028 तक यदि कोई शिक्षक 57 साल की आयु पूरी कर लेता हैं तो वो पांच साल बाद ही रिटायर्ड होने की श्रेणी में आ जाएगा तो उसे अपनी जॉब पूरी करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी,जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में ही आदेश जारी कर दिया था कि जिनकी सेवा निवृत्ति में 5 साल बाकी हैं वे टीईटी की परीक्षा पास करने के आदेश से मुक्त होंगे।

ये नुकसान

नुकसान उन शिक्षकों को हैं जो ये सोंच कर बैठे थे कि कार्यरत शिक्षकों को शायद सुप्रीम कोर्ट टीईटी की परीक्षा से मुक्ति ही दे दे। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।भले ही समय सीमा में इजाफा किया हो पर हर हाल में हर शिक्षक के लिए  टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी होगा ही। अन्यथा उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। खास तौर पर अब वे शिक्षक जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं और अगस्त 2028 तक 57 साल की आयु पूर्ण भी नहीं कर रहे हैं वे अभी भी खासे आहत हैं।फिर शिक्षक समुदाय की तरफ से यही कहा जा रहा हैं कि किसी की भी प्रतिभा में कोई कमी नहीं हैं पर किसी भी परीक्षा देने की कोई उम्र भी होती हैं।बहरहाल भारी अनिश्चितता के बीच अब फिर से किताबें खोल कर अध्ययन तो शिक्षक समुदाय को करना ही होगा।