विचार सरोकार : विद्यालय में स्व-निर्देशित शिक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत  

आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात एआई  का जमाना है। विद्यार्थी विभिन्न स्रोतों से जानकारियां प्राप्त करते हैं, पढ़ते हैं, और परंपरागत शिक्षण के तौर-तरीकों से अलग हटकर पाठ्य-सामग्री को सीखते हैं। वे ये चाहते है कि उनका अध्ययन रुचिकर हो। अपने  शिक्षकों से उनकी अपेक्षा रहती है कि शिक्षक उनके अध्ययन को रुचिकर बनाने का प्रयास करें। 

विचार सरोकार : विद्यालय में स्व-निर्देशित शिक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत  

गजेन्द्र सिंह राठौर

आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अर्थात एआई  का जमाना है। विद्यार्थी विभिन्न स्रोतों से जानकारियां प्राप्त करते हैं, पढ़ते हैं, और परंपरागत शिक्षण के तौर-तरीकों से अलग हटकर पाठ्य-सामग्री को सीखते हैं। वे ये चाहते है कि उनका अध्ययन रुचिकर हो। अपने  शिक्षकों से उनकी अपेक्षा रहती है कि शिक्षक उनके अध्ययन को रुचिकर बनाने का प्रयास करें। 


अगर वर्तमान दौर में शिक्षक ऐसा कर पाने में असफल रहे तो विद्यार्थियों की परंपरागत शिक्षण में रुचि खत्म हो जाएगी और ऐसा देखने में भी आ रहा है। कुछ समय पहले तक उनके स्व-शिक्षण  के लिए यूट्यूब जैसे माध्यम थे, तो आज उनके पास में विभिन्न एआई टूल्स है। ऐसे में कक्षा-शिक्षण में कुछ नयापन नहीं होगा तो वे बोरियत तो महसूस करेंगे ही। इस दृष्टि से स्व-निर्देशित शिक्षण को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। 

⚫ क्या होगा स्व-निर्देशित शिक्षण में 

इस शिक्षण में सीखने के विभिन्न आयाम खुलते हैं जो "भागीदारी के साथ शिक्षण" को सुगम बनाते हैं । कोई भी अध्यापन का टॉपिक हो, उसपर रुचि अनुसार सीखने  को बढ़ावा दिया जाएगा।  इसमें जब भी शिक्षक कुछ विशेष अध्ययन-सामग्री को विद्यार्थियों के समक्ष पढ़ाएंगे, उन्हें रुचि पूर्ण तरीके से रखेंगे।  उसके पश्चात शिक्षक ही विद्यार्थियों से आग्रह करेंगे कि वे अपने तरीके से स्वयं तय करें कि उन्हें उस टॉपिक पर निबंध लिखना है, मॉडल बनाना है, कविता लिखनी है , कोई चित्र बनाना है, पोस्टर बनाना है , या कोई प्रस्तुति अन्य तरीके से तैयार करना है। यह स्टूडेंट्स ही तय करेंगे, शिक्षक उन्हे कुछ समय दें, उसके बाद शायद अगले दिन उस पर बात की जा सकती है। कक्षा से एग्जिट करते समय 'एग्जिट टिकट'' के दौरान या कक्षा शिक्षण में जो सबसे अंत का भाग होता है, जिसमें उनसे गृह कार्य की अपेक्षा की जाती है, उस दौरान भी "स्व-निर्देशित शिक्षण " को चर्चा में लिया जा सकता है।

⚫ अपने विद्यालय से कैसे लागू करेंगे ? 

शिक्षकों की बैठक के अंदर स्कूल-लीडर द्वारा इस पर बातचीत की जा सकती है|  उन्हें किसी तरीके से बताया जा सकता है कि  स्व-निर्देशित शिक्षण को किस प्रकार से अपनाया जाना चाहिए |  उसे कैसे लागू करने का प्रयास करना चाहिए ? ,शिक्षकों से चर्चा में ये तथ्य निकालें कि  " यह बहुत साधारण सा कार्य दिखाई देता है ,लेकिन यह कक्षा-शिक्षण में क्रांतिकारी होगा तथा समयानुकूल भी। ये बच्चों की  रुचि अनुसार उन्हें भागीदारी का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही  उनका जो सीखना है, वह भी स्थाई होगा। उनमें रचनात्मकता, उत्सुकता तथा स्किल का विकास होगा और साथ में 21 वी  सदी के कोशलों का एकीकरण भी।" 

उच्च अपेक्षा जरूरी 

शिक्षक अपने स्टूडेंट्स से अपेक्षा करें  कि वे टॉपिक पर कुछ चार्ट बनाएं, पोस्टर बनाएं, मॉडल बनाएं, निबंध लिखें, कुछ ऑब्जेक्टिव प्रश्न या क्विज़ बनाएं  और फिर अगले दिन आकर कक्षा में इसका प्रस्तुतिकरण करें। शिक्षक उन  प्रस्तुतियो  की सराहना करें और उन्हें आपस में  उसपर चर्चा का समय दें| इससे पाठ का जो ज्ञान है वह स्थाई हो जाएगा।

 ⚫ उदाहरण

 हमनें अपने साथियों के साथ स्व-निर्देशित शिक्षण  को अपनी संस्था सांदीपनि विध्यालय विनोबा रतलाम (जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्था टी फॉर एजुकेशन ने इनोवेशन केटेगरी में 2024 में वर्ल्ड के बेस्ट स्कूल का अवार्ड दिया है) में कैसे अपनाया ? मुझे महसूस हुआ कि इसे शिक्षक साथियों को बोलने की बजाय उन्ही के साथ करके दिखाया जाना चाहिए। मेने एक रोल-प्ले का स्क्रिप्ट बनाया, जिसमें शिक्षक के अध्यापन और सेल्फ-डायरेक्टेड लर्निंग के निर्देशों के बाद अगले दिन स्टूडेंट्स कक्षा में आते हैं ,अपनी बनाई सामग्री और सीख को साझा करते हैं। हमारे 4 -5 शिक्षकों ने नियमित कैप्सूल ट्रेनिंग टाइम "हडल स्पेस"(शाम को सारे शिक्षक एक जगह जमा होकर टीम बिल्डिंग एक्टिविटी करते है)  में  रोल -प्ले किया और उसमें किस तरीके से लर्निंग को  बढ़ावा देना है , इस पर चर्चा की|  शिक्षकों ने  विभिन्न सुझाव चर्चा में साझा किए और कुछ शिक्षक तुरंत ही सेल्फ-डायरेक्टेड लर्निंग को अपने कक्षा-शिक्षण का हिस्सा बनाने लगे। जल्दी ही इसका विस्तार स्कूल की सभी कक्षाओ से होता हुआ ,स्कूल कल्चर का अभिन्न अंग बन जाएगा।

नवाचार जारी रखें

इसके पूर्व हमने स्कूल में स्टूडेंट गोल-शीट को अपनाया, जो आज हमारे यहाँ गुणात्मक सुधार में प्रक्रिया में है,इसी तरह स्व-निर्देशित शिक्षण समय की मांग है। यही आगे चलकर हमारे परंपरागत प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग को भी सहजता से आत्मसात करने में मदद करेगा।

 ⚫ स्कूल लीडर्स से अपेक्षा

बहुत सारे प्रकल्पों को समाकलित करने के लिए विचारवान और समर्पित लीडरशिप के साथ लीडर का टीम में विश्वास, टीम मेम्बर्स को ऑनरशिप देना और उनके साथ सहज रूप से आपसी स्नेह और सकारात्मक स्कूल-संस्कृति बेहद जरूरी है।