मुद्दे की बात : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला…और अदालत से निकली एक पंक्ति “योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं…”
कृष्ण ने भी अधर्मियों का साथ दिया। वह भी एक न्याय था। एक वह भारत था और एक आज भारत है, जिनका कहना है कि औरत की अस्मिता तब तक बाधित नहीं है, जब तक पुरुष का वीर्य उसके योनि में नहीं है, तब तक पुरुष निरपराध है। वाह ! री मानवता, वाह ! रे इंसाफ बलात्कार सिर्फ शरीर में घुसकर नहीं होता, कभी-कभी शब्दों से, नजरों से और इस प्रकार के फैसलों की भाषा से भी औरत की रूह का होता है बलात्कार
⚫“छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास के फैसले से निकला यह वाक्य"
⚫ दीपा शर्मा "उजाला"
“योनि के ऊपर लिंग रखकर वीर्यपात करना बलात्कार नहीं…”
तब तो दुर्योधन दुशासन भी सही थे
कुरुक्षेत्र की वह सभा भी निर्दोष थी
क्योंकि बलात्कार तो
द्रोपदी के साथ भी ना हुआ था
बस साड़ी को ही तो हाथ लगाया था
भरी सभा में दुर्योधन ने अटहास लगाया था
द्रौपदी को वस्त्र हीन कर
मेरी जंघा पर बिठाओ
का मन ही तो भरी सभा में उसने बताया था

क्यों फिर कुरुक्षेत्र में धर्म युद्ध लड़ाया था
तब तो वह धर्म युद्ध न होकर अधर्म युद्ध हुआ
बिना मतलब द्रौपदी ने हाहाकार किया
अर्जुन ने गांडीव क्यों ही हाथ लिया
निर्दोष दुर्योधन दुशासन को पीड़ित किया
भीम ने दुर्योधन की जंघा पर परहार किया
इसका अर्थ है
कृष्ण ने भी अधर्मियों का साथ दिया
वह भी एक न्याय था
एक वह भारत था
और एक आज भारत है
जिनका कहना है कि
औरत की अस्मिता
तब तक बाधित नहीं है
जब तक पुरुष का
वीर्य उसके योनि में नहीं है
तब तक पुरुष निरपराध है
चाहे वह उसको निर्वस्त्र करें
उसके अंग प्रत्यंग से खेले
उसके यह अपराध
उन धाराओं की श्रेणी में नहीं आता
जिसमें उसे कठोर सजा दी जा सके
उसको तो हमारे नेता
यह कहकर भी माफ कर देते हैं
कि वह तो मन के अधीन
कभी बहक जाने वाला बच्चा है
जो स्त्री के कभी छोटे कपड़े देखकर
कभी खुले बाल देखकर या
उसकी हंसी या गुस्सा देखकर बहक जाता है
वह अपराधी कहां है
अपराधी तो स्त्री है जो उसके समक्ष पड़ गई
मर्द तो मर्द है उसको तो बहकने का हक है
फिर किस कारण उसको यह सजा
सजा तो उसको दो उसके स्त्री होने की
भरी सभा में करो उसे लज्जित
नहीं नहीं तुम ऐसा नहीं करोगे
क्योंकि तुम सभ्य समाज के पुरुष हो
तुम तो न्याय के मंदिर में
अपने को निर्दोष और
उसको दोषी साबित करोगे
उसको इस तरह के निर्णय देकर
लज्जित करोगे तभी कहती हूं
तुम पुरुष हो,
पुरुष ही रहोगे
तुम कभी कृष्ण और राम ना बन सकोगे
तुम अपराध की परिभाषा में उलझे रहे
और वह पल-पल अपनी देह में सिकुड़ती रही
तुम्हारी परिभाषा से एक स्त्री सिर्फ हाथ
लगाने से ही दुषित नहीं होती है।
अरे यह भारत की नारी है
जो कुदृष्टि पड़ने पर अग्नि परीक्षा देती है
और कहीं टूट जाती है भीतर तक,
खत्म हो जाता है उसका आत्मविश्वास
उठ जाता है इंसानियत पर से विश्वास
वाह ! री मानवता, वाह ! रे इंसाफ
बलात्कार सिर्फ शरीर में घुसकर नहीं होता,
कभी-कभी शब्दों से, नजरों से और इस प्रकार के फैसलों की भाषा से भी औरत की रूह का होता है बलात्कार

⚫ दीपा शर्मा "उजाला" फरीदाबाद
Hemant Bhatt