केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के काफिले के सामने आए स्कूली बच्चे और ग्रामीण, मची खलबली
क्या प्रशासन और हाईवे अथॉरिटी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? अगर आज केंद्रीय मंत्री के काफिले की जगह कोई अनियंत्रित तेज रफ्तार वाहन होता, तो इन मासूम बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होता? एटलेन पर तत्काल पैडेस्ट्रियन क्रॉसिंग या फुट ओवरब्रिज का निर्माण बेहद जरूरी है।
⚫ सुरक्षा से ज्यादा 'मजबूरी' का मामला : रोज़ मौत के साए में सड़क पार करते हैं नौनिहाल
⚫ सुरक्षा व्यवस्था और एटलेन प्रबंधन पर उठे सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 10 जुलाई। जिले के शिवगढ़ ब्रिज के समीप एटलेन पर गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब देश के केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के हाई-प्रोफाइल काफिले के सामने अचानक कुछ ग्रामीण और मासूम बच्चे आ गए। ग्रामीणों ने काफिले के वाहनों को हाथ देकर रुकवाने का प्रयास किया, जिससे सुरक्षा अमले में एक बारगी अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, मौके पर मुस्तैद पुलिस अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को संभाला और किसी भी अप्रिय घटना के बिना काफिले को सुरक्षित आगे रवाना किया।

सुरक्षा से ज्यादा 'मजबूरी' का मामला : रोज़ मौत के साए में सड़क पार करते हैं नौनिहाल
घटना के बाद जब पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद 3 ग्रामीणों और उनके साथ मौजूद 3-4 नाबालिग बच्चों से पूछताछ की, तो एक बेहद चौंकाने वाली और सिस्टम को आइना दिखाने वाली हकीकत सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि वे किसी विरोध या जानबूझकर काफिले को रोकने नहीं आए थे। दरअसल, एटलेन हाईवे के दूसरी ओर बच्चों का विद्यालय स्थित है। बच्चों की उम्र बेहद कम होने के कारण ग्रामीण हर दिन खुद उन्हें हाथ देकर गाड़ियां रुकवाते हैं और सुरक्षित सड़क पार कराकर स्कूल छोड़ने जाते हैं। गुरुवार को भी वे हर दिन की तरह बच्चों को स्कूल ले जा रहे थे। उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि उसी समय केंद्रीय मंत्री का वीआईपी काफिला वहां से गुजरने वाला है।
एटलेन के जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही : नहीं है बच्चों के लिए कोई सुरक्षित रास्ता
इस पूरी घटना ने एटलेन (8-Lane Highway) के प्रबंधन और योजनाकारों की एक बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और हाईवे अथॉरिटी को यह तक नहीं पता कि हर दिन ग्रामीण और स्कूली बच्चे इसी खतरनाक रास्ते से जान जोखिम में डालकर आते-जाते हैं। हाईवे बनाते समय पैदल यात्रियों, विशेषकर स्कूली बच्चों के लिए अंडरपास या ओवरब्रिज जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी की गई, जिसके कारण आज देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले वीआईपी काफिले के सामने यह स्थिति निर्मित हो गई।
पुलिस ने दी समझाइश, स्थानीय स्तर पर समन्वय की कवायद शुरू
पूछताछ और जांच के बाद पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली कि कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनी। पुलिस अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को वीआईपी मूवमेंट (VIP Movement) के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी गई और भविष्य में ऐसा न करने की समझाइश दी गई। ग्रामीण को पूछताछ के कटघरे में खड़ा कर दिया जैसे उन्होंने कोई गुनाह किया हो जबकि वह तो अपने जो निहालों को स्कूल ही ले जा रहे थे, ताकि उनका भविष्य स्वर्णिम हो। गलती तो उन जिम्मेदारों की जिन्हें पता नहीं था कि सामने के गांव के बच्चे 8 लाइन के दूसरे बार हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल में पढ़ने जाते हैं, एटलेन उन जिम्मेदारों में पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिनको पता नहीं था कि हर दिन ऐसा भी होता है। कटघरे में तो उन्हें खड़ा करना चाहिए था मगर बेबस ग्रामीणों से पूछताछ हो गई।
जिम्मेदार नजर आए अब जागते हुए
इसके साथ ही, पुलिस और स्थानीय प्रशासन अब जागता हुआ दिखाई दे रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों के रोजमर्रा के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों और स्कूल प्रबंधन के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में बच्चों की जान को खतरा न हो और न ही वीआईपी सुरक्षा में कोई चूक हो। मगर अब तक एटलेन प्रबंधकों और जिम्मेदारों से कोई पूछताछ नहीं हुई है कि आखिर रोज़ जब ऐसी स्थिति बनती है तो पहले बताया क्यों नहीं, क्या उन्हें पता नहीं था की एटलेन पर क्या हो रहा है? जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है। जंक्शन स्थल धामनोद के यहां पर कार्यालय के बना हुआ है। इसी विभाग के मंत्री के आने के बावजूद भी लापरवाही करने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं।
मुद्दे की बात
पैडेस्ट्रियन क्रॉसिंग या फुट ओवरब्रिज का निर्माण बेहद जरूरी
क्या प्रशासन और हाईवे अथॉरिटी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? अगर आज केंद्रीय मंत्री के काफिले की जगह कोई अनियंत्रित तेज रफ्तार वाहन होता, तो इन मासूम बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होता? एटलेन पर तत्काल पैडेस्ट्रियन क्रॉसिंग या फुट ओवरब्रिज का निर्माण बेहद जरूरी है।
Hemant Bhatt