अपर कलेक्टर की कार्रवाई : समय पर काम न करने वाले एक महिला व एक पुरुष नायब तहसीलदार पर लगा जुर्माना

अपर कलेक्टर की कार्रवाई : समय पर काम न करने वाले एक महिला व एक पुरुष नायब तहसीलदार पर लगा जुर्माना

दावों और 'सुशासन' की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई 

⚫ सरकारी कुर्सियों पर बैठकर आवेदनों को ठंडे बस्ते में डाल रहे जिम्मेदार

⚫ ऐसे के खिलाफ जरूरी है विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई

हरमुद्दा
​रतलाम, 10 जुलाई। जनता को समय पर सरकारी सेवाएं देने के दावों और 'सुशासन' की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 को ठेंगा दिखाने वाले लापरवाह अधिकारियों पर जुर्माने गाज गिरी है। आमजन का तो यही मानना है कि ऐसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभाग की जांच और निलंबन तक की कार्रवाई होना चाहिए जुर्माना कार्रवाई काफी नहीं है।

आम जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाने और समयसीमा में काम न करने के गंभीर मामले में अपर कलेक्टर बृजेंद्र कुमार रावत ने सख्त रुख अपनाते हुए दो राजस्व अधिकारियों पर कुल 5,250 रुपये का अर्थदण्ड (जुर्माना) ठोक दिया है।यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो सरकारी कुर्सियों पर बैठकर आवेदनों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।

​21 फाइलों को दबाए बैठे रहे जिम्मेदार, आवेदकों को किया परेशान

​सरकारी नियम कायदों के मुताबिक लोक सेवा गारंटी के तहत आने वाले आवेदनों का निपटारा एक तय समयसीमा के भीतर करना अनिवार्य होता है। लेकिन न्यायालय नायब तहसीलदार आलोट और न्यायालय नायब तहसीलदार टप्पा कालूखेड़ा में जनता के काम को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही थी। समीक्षा के दौरान इन दोनों न्यायालयों के कुल 21 प्रकरण समयसीमा के बाहर यानी ओवरड्यू पाए गए। समय पर निराकरण न होने के कारण दूर-दराज से आने वाले आवेदकों को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होना पड़ा, जो सीधे तौर पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

​इन अधिकारियों पर गिरी गाज

​अपर कलेक्टर ने अधिनियम की धारा 7(1)(क) के तहत जवाबदेही तय करते हुए दोनों जिम्मेदार अधिकारियों की जेब पर वार किया है।

⚫ ​राजेश पाटीदार (नायब तहसीलदार, आलोट): इनके न्यायालय में सबसे ज्यादा 18 प्रकरण समयसीमा के बाद भी पेंडिंग पाए गए। लापरवाही के इस बड़े आंकड़े पर उन पर 4,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

⚫ ​श्रद्धा द्विवेदी (नायब तहसीलदार, टप्पा कालूखेड़ा): इनके स्तर पर भी 3 प्रकरण तय समय में पूरे नहीं किए गए, जिसके चलते इन पर 750 रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।

मुद्दे की बात

आम लोगों का कहना है कि जनता के काम में देरी के बदले लगाया गया यह चंद रुपयों का जुर्माना क्या इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार ला पाएगा? जब तक फाइलों को लटकाने वाले इन जिम्मेदार कुर्सियों पर बैठे अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच और निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लोक सेवा गारंटी अधिनियम का असली मकसद पूरा होना मुश्किल नजर आता है।