रतलाम में इस बार मानसून की सुस्त शुरुआत: गत वर्ष के मुकाबले अब तक 32% कम बरसे बदरा
⚫ शुक्रवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटे में नहीं बरसे मेघा
हरमुद्दा
रतलाम, 10 जुलाई। जिले में इस वर्ष मानसून की रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी धीमी नजर आ रही है। 9 जुलाई सुबह 8 बजे से 10 जुलाई सुबह 8 बजे तक जिले में कहीं पर भी बारिश दर्ज नहीं हुई है। अब तक जिले में 32 फीसद कम बदरा बरसे हैं। गुरुवार को भी दिनभर आसमान में बादलों का कब्जा रहा। सूरज के साथ लुका छुपी चलती रही।

1 जून से 10 जुलाई 2026 तक जिले में कुल 228.38 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। वहीं, पिछले वर्ष (2025) इसी अवधि तक जिला 337.88 मिलीमीटर औसत बारिश के साथ सराबोर हो चुका था। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो इस साल अब तक करीब 32.4% कम बारिश दर्ज हुई है।
जिले की सामान्य औसत वर्षा 918.3 मिलीमीटर है, जिसके मुकाबले अब तक करीब 25% कोटा ही पूरा हो पाया है। राहत की बात यह है कि आज (9 और 10 जुलाई) पूरे जिले में मौसम साफ रहा और किसी भी केंद्र पर बारिश दर्ज नहीं की गई।
तहसीलवार स्थिति: कहीं राहत, कहीं बड़ी चिंता
जिले के अलग-अलग वर्षामापी केंद्रों के आंकड़े बताते हैं कि इस बार मानसून का मिजाज काफी असमान रहा है।
आलोट और ताल में सुधार
आलोट में इस साल अब तक 281 मिमी बारिश हो चुकी है, जो पिछले साल की इस अवधि (193 मिमी) से काफी बेहतर है। इसी तरह ताल में भी गत वर्ष के 141 मिमी के मुकाबले इस बार 196 मिमी पानी गिर चुका है।
सैलाना और रावटी में भारी कमी
सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति सैलाना और रावटी की है। सैलाना में पिछले साल इस समय तक 555 मिमी (रिकॉर्ड तोड़) बारिश हो चुकी थी, जबकि इस बार महज 212 मिमी ही दर्ज हुई है। वहीं रावटी में भी गत वर्ष के 489 मिमी के मुकाबले इस साल केवल 174 मिमी वर्षा हुई है।
रतलाम शहर रहा स्थिर
जिला मुख्यालय (रतलाम तहसील) में स्थिति पिछले साल जैसी ही बनी हुई है। गत वर्ष अब तक यहां 332 मिमी पानी गिरा था, तो इस बार आंकड़ा 329 मिमी के करीब है।
मुद्दे की बात
आलोट और ताल के किसानों के लिए शुरुआती आंकड़े राहत देने वाले हैं, लेकिन जिले के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों (सैलाना, रावटी, बाजना) में कम बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में अच्छी झड़ी लगना बेहद जरूरी है ताकि फसलों को सही पोषण मिल सके और जिला अपनी सामान्य वर्षा (918.3 मिमी) के आंकड़े को छू सके।
Hemant Bhatt