धर्म संस्कृति : भारत की सांस्कृतिक एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने में शंकराचार्य जी ने देश को एक सूत्र में पिरोया
⚫ आद्य गुरु शंकराचार्य जयंती पर प्रोफेसर डॉक्टर खुशबू राठी ने कहा
हरमुद्दा
रतलाम 22 अप्रैल। आद्य गुरु शंकराचार्य विश्व में दार्शनिक व विचारक जगत के सबसे अधिक दैदीप्यमान रत्न है। बड़े-बड़े विद्वानों ने उन्हें “दार्शनिक सार्वभौम“ और जगतगुरू कहकर सम्मानित किया है।

यह विचार प्रोफेसर डॉ. खुशबू राठी ने व्यक्त किए। प्रोफेसर राठी श्री सनातन धर्म सभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति तथा सर्व ब्राह्मण समाज के द्वारा संयुक्त रूप से श्री शंकराचार्य जयंती पर त्रिवेणी तट पर आयोजित महोत्सव के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थी।
व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़ने का किया कार्य
शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. राठी ने कहा कि भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए एवं भारत की सांस्कृतिक एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने के लिए चार धाम की स्थापना की। जो कि जीवन में एक बार करना प्रत्येक हिन्दू का आध्यात्मिक लक्ष्य होता है। वास्तव में यह सिर्फ तीर्थाटन ही नहीं है वरन कश्मीर से कन्याकुमारी तक संपूर्ण भारत को एक करने के लिए व्यक्ति से व्यक्ति को जोड़ने का कार्य है जिससे भारत की सांस्कृतिक एकता का सूत्रपात होता है। चार धाम में चार मठ और चारों वेदों के एक-एक वाक्य जिसमें मानव के संपूर्ण जीवन का लक्ष्य परिलक्षित होता हैं।
छवि चित्र का विमोचन

सनातन धर्म सभा द्वारा शंकराचार्य जी की एक छवि चित्र का विमोचन किया गया। जिसका सनातन धर्म तथा महारुद्र यज्ञ समिति में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से वर्षों से सहयोग व समर्पण करते आ रहे हैं हजारों आधार स्तंभों को भेट देने का शुभारंभ किया गया। स्वागत भाषण मे सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष ने दिया। आद्य गुरु शंकराचार्य जी की जन्म जयंती पर सर्व ब्राह्मण समाज की ओर से अभिषेक करवाया गया। यजमान मुकेश जोशी दंपति थे।
यह थे मौजूद
सर्व ब्राह्मण महासभा के पुष्पेंद्र जोशी, नरेंद्र जोशी, प्रवीण उपाध्याय, ओम प्रकाश त्रिवेदी, हरीश सुरोलिया, नवनीत सोनी, रामचंद्र जी पंडित शर्मा, रमेश व्यास, लालचंद टांक, तारा देवी सोनी, हंसा व्यास, राखी व्यास, रजनी व्यास, मोहनलाल जी भट्ट, शैलेंद्र तिवारी, बसंत पंड्या, सुभाष शर्मा, सुरेश दवे, सतीश पुरोहित, अविनाश व्यास सहित अनेक जन उपस्थित थे।
संचालन नरेंद्र त्रिवेदी ने किया। आभार मनोहर पोरवाल ने माना। आचार्य पंडित दुर्गा शंकर जी ओझा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
फोटो: हेमेंद्र उपाध्याय
Hemant Bhatt