एसी कमरों में बैठे अफसरों का अनोखा गणित : 30 मई को आया आदेश, 1 मई से बढ़ा अवकाश! 

एसी कमरों में बैठे अफसरों का अनोखा गणित : 30 मई को आया आदेश, 1 मई से बढ़ा अवकाश! 

शिक्षकों ने पूछा—जब मई खत्म होने को है, तब 1 मई से 7 जून तक छुट्टी बढ़ाने का आदेश किसके लिए?

हरमुद्दा
रतलाम, 30 मई। मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी और हीट वेव के बीच लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। लेकिन इस आदेश की टाइमिंग ने शिक्षकों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि आदेश 30 मई के आस-पास चर्चा में आया, जबकि इसमें अवकाश अवधि 1 मई 2026 से 7 जून 2026 तक घोषित की गई है।


शिक्षकों का कहना है कि मई माह लगभग समाप्त हो चुका है और अधिकांश शिक्षक पहले ही बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन, जनगणना तथा अन्य शासकीय कार्यों में लगे रहे हैं। ऐसे में एक माह बीत जाने के बाद अवकाश बढ़ाने का आदेश जारी करने का औचित्य समझ से परे है। 

हो सकता ऐसा हुआ हो

कई शिक्षकों ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “शायद एसी कार्यालयों में बैठे अधिकारियों को अब जाकर गर्मी का अहसास हुआ है।”

शिक्षकों की सेहत के हित में आदेश

आदेश में प्रदेश में 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और हीट वेव का हवाला देते हुए शिक्षकों के स्वास्थ्य हित में अवकाश बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि गर्मी और स्वास्थ्य की चिंता थी तो निर्णय समय रहते क्यों नहीं लिया गया? शिक्षक संगठनों का कहना है कि अवकाश की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन निर्णय तब प्रभावी माना जाता है, जब वह समय पर लिया जाए। एक माह बाद जारी आदेश से शिक्षकों को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलती, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

लाभ किसे मिलता शिक्षकों को या फाइलों को

शिक्षा जगत में अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ऐसे आदेशों का लाभ किसे मिलता है—शिक्षकों को या केवल फाइलों को। फिलहाल प्रदेशभर के शिक्षकों के बीच यही सवाल गूंज रहा है कि “जब मई बीत गई, तब 1 मई से छुट्टी बढ़ाने की याद क्यों आई?” लगता है एसी कम्रोक में बैठे अफसर ने मौसम विभाग की बात पर विश्वास कर लिया था और मान लिया था कि मध्य प्रदेश में भी जून के पहले सप्ताह से बारिश शुरू हो जाएगी। मगर ऐसा 30 तारीख तक केरल में नहीं हुआ तो एक सप्ताह का अवकाश और बढ़ाने का संशोधित आदेश निकाल दिया। जबकि एक सप्ताह के अवकाश का नया आदेश भी निकाल सकते थे मगर वह लिखने की भी जहमत नहीं उठाई।