साहित्य सरोकार : सुरों से सजी सांझ से झंकृत हुए साहित्य और संगीत प्रेमी
⚫ साहित्यकार प्रोफेसर अज़हर हाशमी के गीतों की संगीतमयी प्रस्तुतियों की "रूहानियत" ने बांधा समां
⚫ "बलिहारी गुरु आपकी" का हुआ लोकार्पण
⚫ नवोदित उत्कृष्ट शिक्षा, साहित्य और काव्य पाठ को मिलेगा 51000 का पुरस्कार
⚫ कलाकारों का किया सम्मान
हरमुद्दा
रतलाम, 13 जुलाई। शनिवार को साहित्यकार चिंतक अज़हर हाशमी पर केंद्रित रूहानियत का आयोजन हुआ। सुरों से सजी सांझ से साहित्य और संगीत प्रेमी झंकृत हुए। प्रोफेसर हाशमी के गीतों की शहर के कलाकारों ने उम्दा प्रस्तुति देकर उपस्थितों को अभिभूत कर दिया। आयोजन में बलिहारी गुरु आपकी का विमोचन किया गया। गायक कलाकारों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

बलिहारी गुरु आपकी पुस्तक का विमोचन करते हुए अतिथि
3 घंटे तक चले आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे संगीतकार सिद्धार्थ काश्यप। अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने की। विशेष अतिथि के रूप में संपादक क्रांति चतुर्वेदी मौजूद रहे। अतिथियों ने प्रोफेसर हाशमी और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। अतिथियों का स्वागत डॉक्टर अनिला कंवर, सतीश त्रिपाठी, तुषार कोठारी, हेमंत भट्ट ने किया। अतिथियों का परिचय श्वेता नागर ने दिया। अतिथियों ने "बलिहारी गुरु आपकी" पुस्तक का लोकार्पण किया।
इनकी प्रस्तुति में मनमोहा

गीतों की प्रस्तुति देते हुए कलाकार
प्रोफेसर हाशमी के कविताओं ने गीतों का रूप लिया। सुरों से सजी सांझ में डॉ. स्नेहा पंडित के निर्देशन में गीतों की प्रस्तुतियां हुई। शहर के गायक कलाकार किरण छाबड़ा, संगीता जैन, प्राची पुरोहित, रुद्राक्ष दवेसर, जितेंद्र चौहान और अक्षद पंडित ने हाशमी जी की कविताओं को संगीतबद्ध उम्दा प्रस्तुत या देकर साहित्य और संगीत प्रेमियों को अभिभूत कर दिया। तबले पर तल्लीन द्विवेदी एवं हारमोनियम पर रोहित परिहार ने संगत की।

कलाकारों के साथ अतिथि
इस तरह के रहे गीत
⚫ "दुनिया से तो बहुत मिला, तू खुद से भी तो मिल"
⚫ "कोई ना हो उदास, तो समझो बसंत है"
⚫ "कभी काजू घना, कभी मुट्ठी चना"
⚫ "जीत जाएगा कि तू प्रयास कर"
⚫ "दूसरों का दर्द लेना, सिलसिला रहा..."
⚫ "सभ्यता पोखर की पंकिल गंध हो जैसे"...
⚫ "कर्म कभी पीछा नहीं छोड़ता श्रीमान "
तब होती रही करतल ध्वनि जब गूंजा "मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए"

प्रस्तुति देते हुए काश्यप
आयोजन में जब प्रो. हाशमी द्वारा रचित लोकप्रिय गीत "मुझको राम वाला हिंदुस्तान चाहिए" की प्रस्तुति हुई तब सभागार करतल ध्वनि से गूंज उठा। उल्लेखनीय है कि इस गीत स्वर दिया रूप कुमार राठौर ने और संगीत से सजाया सिद्धार्थ काश्यप ने।
साहित्य अकादमी के वीडियो का भी हुआ प्रदर्शन
कार्यक्रम में साहित्य अकादमी द्वारा प्रोफेसर हाशमी पर निर्मित वीडियो क्लिपिंग भी दिखाई गई। वरिष्ठ पत्रकार अर्चना शर्मा द्वारा तैयार किया गया एक विशेष पॉडकास्ट भी दर्शकों के साथ साझा किया गया।
उत्कृष्ट रचना को 51000 का पुरस्कार देने की घोषणा की संगीतकार काश्यप ने

संगीतकार काश्यप विचार व्यक्त करते हुए
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिद्धार्थ काश्यप ने घोषणा करते हुए कहा कि वे प्रतिवर्ष अजहर हाशमी के जन्म दिन पर देश, प्रदेश, शहर के किसी नवोदित शिक्षा, साहित्य और काव्य पाठ को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए ₹51,000 का पुरस्कार विद्यार्थी परिवार के माध्यम से देंगे।
उनकी काव्य-संवेदना प्रेरणास्रोत

डीआरएम संबोधित करते हुए
प्रो. हाशमी की लेखनी सरल सहज और संवेदनशील है। उनके गीत सीधे दिल में उतरते हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उनकी काव्य संवेदना प्रेरणास्रोत है।
⚫ अश्वनी कुमार, मंडल रेल प्रबंधक, रतलाम
बने आयोजन के साक्षी

सुरों से सजी सांझ के साक्षी कला प्रेमी
संगीतमयी प्रस्तुतियों के आयोजन रूहानियत के साहित्य, कला, संगीत प्रेमी, लेखक साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, प्रो. रतन चौहान, कैलाश व्यास, ओ.पी. मिश्र, आशीष दशोत्तर, डॉ. सुलोचना शर्मा, अरुण कुमार जैन, रमेश चोपड़ा, गोपाल जोशी, अदिति दवेसर, संजय परसाई, एडवोकेट मनमोहन दवेसर, सुनील जैन, पत्रकार तुषार कोठारी, आरिफ कुरैशी, नीरज शुक्ला, जलज शर्मा, डॉक्टर एसके जोशी, प्रोफेसर पीसी पाटीदार, प्रोफेसर आरपी पाटीदार, पुष्पेंद्र जोशी, सुहास चितले, डॉ.पूर्णिमा शर्मा, वृत्तिका त्रिपाठी, स्मिता शुक्ला, इंदू सिंहा, सुरेखा नागर, वैदेही कोठारी, स्मिता राठौर, अंजना सक्सेना, नरेन्द्रसिंह पंवार, रितेश जैन, राजेंद्र सिंह राठौड़, आनंद नगरकर, यशपाल सिंह तवंर, प्रोफेसर हाशमी की सेवादार बापू के अतिरिक्त बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, गणमान्य नागरिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग कार्यक्रम के साक्षी रहे।
स्मृति चिह्न देकर किया सम्मान

डीआरएम को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए

डॉ. पंडित को स्मृति चिह्न देते हुए काश्यप
गायक कलाकारों को अतिथियों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अतिथियों को भी स्मृति चिह्न भेंट किए गए। संचालन डॉ. प्रवीणा दवेसर ने किया। विद्यार्थी परिवार के सतीश त्रिपाठी ने आभार माना।
फोटो : लगन शर्मा
Hemant Bhatt