धर्म संस्कृति : पर्यावरण को नष्ट करके हम परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते
⚫ महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वतीजी महाराज ने कहा
हरमुद्दा
रतलाम, 4 जून। महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वतीजी महाराज ने कहा है हमारा धर्म धरती से जुड़ा है। प्रकृति से ही धर्म पोषित होता है। पृथ्वी, जल, वायु, तेज और अग्नि के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है । पर्यावरण को नष्ट करके हम परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते । यदि हम प्रकृति से जुड़े रहे तो वह हमें परमात्मा से जोड़ देगी। विश्व पर्यावरण दिवस पर हम प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सजग रहने का संकल्प लें।

श्री हरिहर सेवा समिति एवं श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्र्स्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में स्वामीजी ने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया।

सनातन धर्म में ही अद्वितीय अवधारणा
उन्होंने कहा कि यह सनातन धर्म ही है जो प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप देखकर उसकी पूजा के माध्यम से उसके संरक्षण और संवर्धन का संदेश देता है । हमने गंगा और गाय में माता के दर्शन किये है तो पीपल और वट आदि वृक्षों को पवित्र मानकर पूजन किया है। भगवान श्रीकृष्ण ने तो पीपल के वृक्ष को विभूति कहा है। तुलसी का हम पूजन और परिक्रमा करते है । यह अद्वितीय अवधारणा केवल हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों में ही मिलती है । जिसका हमें गौरव है । न केवल प्रकृति बल्कि समस्त जीव को परमात्मा रूप देखा गया है । तुलसीदास जी ने लिखा है सियाराममय सब जग जानी
आरडीए उपाध्यक्ष सोनी ने लिया आशीर्वाद

इस अवसर पर आरडीए उपाध्यक्ष प्रवीण सोनी ने स्वामीजी के दर्शन कर आरती में भाग लिया। उनका आयोजन समिति की ओर से अभिनन्दन किया गया।
Hemant Bhatt