प्रशासनिक कार्रवाई : पटवारी आत्महत्या मामले में नायब तहसीलदार सविता राठौर निलंबित
⚫ पटवारी रवि खराड़ी द्वारा आत्महत्या के बाद विभाग में शोक और आक्रोश
⚫ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर डटे
हरमुद्दा
रतलाम, 22 अप्रैल। बुधवार को राजस्व विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार सविता राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह सख्त कदम पटवारी रवि खराड़ी द्वारा की गई आत्महत्या और उनके सुसाइड नोट में लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है। इधर आदिवासी समाज और मृतक के परिजन नायब तहसीलदार पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

आत्महत्या करने वाला पटवारी रवि खराड़ी
मंगलवार को पटवारी रवि खराड़ी ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया था, जिसके बाद पूरे विभाग में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट और परिजनों के बयानों में नायब तहसीलदार राठौर पर मानसिक प्रताड़ना और कार्य के दौरान अत्यधिक दबाव बनाने के आरोप लगे थे।
संभाग आयुक्त के अनुमोदन के पश्चात कार्रवाई
कलेक्टर मिशा सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर संभाग आयुक्त आशीष सिंह द्वारा अनुमोदन के पश्चात यह कार्रवाई की है। निलंबन आदेश में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं का उल्लेख किया गया है।
प्रशासकीय शिथिलता : अपने अधीनस्थ कर्मचारी के प्रति संवेदनहीन रवैया।
कर्तव्य के प्रति लापरवाही : विवादित कार्यप्रणाली जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई।
निष्पक्ष जांच का आधार : जांच प्रभावित न हो, इसलिए सविता राठौर को उनके पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
पटवारी संघ में रोष और न्याय की मांग
पटवारी रवि खराड़ी की मौत के बाद से ही 'पटवारी संघ' लामबंद हो गया था। संघ का आरोप है कि राजस्व विभाग में निचले स्तर के कर्मचारियों पर काम का बोझ और वरिष्ठ अधिकारियों का व्यवहार असहनीय होता जा रहा है। "यह केवल एक निलंबन नहीं, बल्कि उन सभी अधिकारियों के लिए चेतावनी होनी चाहिए जो अपने पद का दुरुपयोग कर अधीनस्थों का शोषण करते हैं। हमें रवि के परिवार के लिए पूर्ण न्याय चाहिए।" ⚫ पटवारी संघ
अब आगे क्या?
सविता राठौर के निलंबन के साथ ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच (Magisterial Inquiry) शुरू कर दी गई है। पुलिस भी सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और कॉल डिटेल्स की बारीकी से जांच कर रही है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया के तहत एफआईआर (FIR) की तलवार भी लटक सकती है।
Hemant Bhatt