साहित्य रचना : "खुश रहना मेरी माँ"

जन्म-मरण से होकर मुक्त तू परम आत्मा में,  हो जा विलीन मेरी माँ, जन्म मरण से होकर मुक्त तू रब की गोदी में,  खुश रहना मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

साहित्य रचना : "खुश रहना मेरी माँ"

⚫ कवयित्री डॉ. सलोनी चावला 

कष्टों के जीवन को त्याग कर सुख की दुनिया में,
खुश रहना मेरी मां,
 
अपनी तकलीफ़ें भूल कर खुशियों की गोदी, 
तुझको नसीब मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

यह आखिरी अपना पैगाम है तुझको, 
सपनों से भी प्यारा, वह जहान मिले तुझको।
 
फूल ही फूल खिलें जहां पर, कांटा कोई नहीं, 
ऐसा जहां मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

बच्चों की तू अपनी चिंता नहीं करना, 
चिंता करेगा वह, जिसका काम है करना।

हर फिक्र के आलम को छोड़कर मस्ती के आलम में, 
मस्त रहना मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

हम पर तेरा विश्वास, हम कभी न तोड़ेंगे, 
संस्कार दिए तूने, हम कभी न भूलेंगे।
 
नाम तेरा रखेंगे ऊँचा हम जब तक नस-नस में, 
बहेगा लहू मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

इक पल खुशी का भी, तरसी तू जीवन भर, 
जब मौत भी आई, लड़ गई हमरी ख़ातिर।
 
ऐसी शक्ति सदके जाऊं, भर के असीसों में, 
हमको भी दे दे मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

हर जन्म के बन्धन से, तू आज़ाद हो जाए, 
यह बेटियां तेरी, देतीं तुझे दुआएँ।
 
जन्म-मरण से होकर मुक्त तू परम आत्मा में, 
हो जा विलीन मेरी माँ,
जन्म मरण से होकर मुक्त तू रब की गोदी में, 
खुश रहना मेरी माँ, खुश रहना मेरी माँ।

⚫ डॉक्टर सलोनी चावला मां के साथ