भाजपा सरकार का लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला

सत्ता की नीतियों के खिलाफ सवाल उठाने और सच दिखाने वाली रीलों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है। क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के स्वरों का इस प्रकार दमन किया जाना उचित है?

भाजपा सरकार का लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला

⚫ रतलाम कांग्रेस जिलाध्यक्ष हर्षविजय गेहलोत का इंस्टाग्राम अकाउंट बैन

हरमुद्दा
​रतलाम, 15 अक्टूबर। देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सरकार आम जनता की आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधियों, मीडिया और अब सोशल मीडिया के मंचों का गला घोंटने का काम कर रही है।

रतलाम कांग्रेस के जिला प्रवक्ता सुजीत उपाध्याय ने कहा कि यह कार्रवाई सत्ताधीशों के मन में जनता के बढ़ते आक्रोश और उनके गहरे डर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

​क्या है पूरा मामला?

​इंस्टाग्राम अकाउंट पर पाबंदी: रतलाम कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत का आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट मेटा कंपनी द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के भारत भर में बंद कर दिया गया है।

​'वोट चोर गद्दी छोड़' रील बनी वजह

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, हर्षविजय गेहलोत ने अपने अकाउंट पर 'वोट चोर गद्दी छोड़' शीर्षक से एक रील साझा की थी। इसके तुरंत बाद किसी वैध कारण या नोटिस के बिना उनके अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया।

​कांग्रेस का तीखा विरोध:

जिला कांग्रेस ने इसे तानाशाही रवैया करार देते हुए कहा है कि यह सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है और सरकार की दमनकारी नीति को उजागर करता है।

​सरकार की मंशा पर उठे सवाल

​जिला प्रवक्ता उपाध्याय ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या वर्तमान समय में सत्ता से सवाल पूछना और सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करना अपराध बन गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल कागजों तक सीमित रह गई है। सरकार अपने खिलाफ उठने वाली हर सच्ची आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है, लेकिन इस तरह का डर और दबाव बनाकर जनता की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सकता।

​कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा

​कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की स्वतंत्रता के हनन के खिलाफ उनकी यह लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी। सोशल मीडिया पर इस प्रकार की सेंसरशिप और पाबंदियों के खिलाफ कांग्रेस कानूनी और राजनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराएगी।

​मुद्दे की बात : सत्ता की नीतियों के खिलाफ सवाल उठाने और सच दिखाने वाली रीलों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है। क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के स्वरों का इस प्रकार दमन किया जाना उचित है?