शख्सियत : पढ़े लिखे लोग भी हो रहे डिजिटल अरेस्ट
साइबर फ्राॅड एक ऐसी अवैध और आपराधिक गतिविधि है जिसमें धोखेबाज लोग कंप्युटर, इंटरनेट, स्मार्टफोन, नेटवर्क या डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करके लोगों के पैसे, निजी जानकारी या उनकी पहचान चुराते हैं।
⚫ कवयित्री बेबी सुचरिता सिंहा का कहना
⚫ नरेंद्र गौड़
‘‘हम आए दिन सुनते हैं, फलां व्यक्ति आज इतने लाख रूपए मोबाइल अरेस्ट के जरिए ठगा गया। ऐसे लोगों में कई बार तो वकील, इंजीनियर, डाॅक्टर ही नहीं आईएएस अफसर तक फांस लिए जाते हैं। एक बार यदि कम पढ़ा लिखा देहाती आदमी ठगा जाए तो बात कुछ समझ में भी आती है, लेकिन जब उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति ऐसे ठगोरों के चंगुल में फंस जाते हैं, तब उनकी समझदारी और बुध्दि पर तरस आता है। दिवाली की खरीदारी में भी आकर्षक आॅफर के जरिए साइबर ठगी होने लगी है, ऐसे में इन महाघूर्तो के जाल को समझना बहुत जरूरी है।’’

यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुरस्कृत विष्णुप्रिया-मणिपुरी भाषा की कवयित्री, अनुवादक एवं गायिका सुचरिता सिंहा ने कही। इन्होंने बताया कि साइबर ठगों ने इसी साल देश को लगभग 800 करोड़ रूपए का चूना लगा दिया है। गृह मंत्रालय व्दारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 56,087 करोड़ से अधिक रकम गंवाने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। यदि बैंक की लापरवाही ऐसे मामलों में सामने आई तो उसे मुआवजा भरने के आदेश दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है। एक बात और दिवाली पर आॅनलाइन आॅर्डर बढ़ने के कारण लोग डिलीवरी संबंधी संदेशों पर तुरंत भरोसा कर लेते हैं, ठग इसी स्थिति का फायदा उठाकर पैकेज डिलीवर न होने, पता अधूरा होने या पार्सल रोकने का दावा करते हैं। इसके बाद मामूली शुल्क जमा करने या पता अपडेट करने के लिए लिंक भेजा जाता है। ऐसे लिंक पर बैंकिंग जानकारी दर्ज करने या अनजान ऐप डाउनलोड करने से वित्तीय नुकसान हो सकता है।
यूपीआई भुगतान और क्यूआर कोड में सावधानी जरूरी
एक सवाल के जवाब में सुचरिता जी ने बताया कि दुकानों और आॅनलाइन प्लेटफाॅर्म यूपीआई भुगतान सुविधाजनक है, लेकिन गलत भुगतान अनुरोध स्वीकार करने से नुकसान हो सकता है। ठग लोग कैशबैक, गिफ्ट वाउचर या दिवाली बोनस का लालच देकर क्यूआर कोड स्कैन करने और पिन दर्ज करने के लिए कह सकते हैं। एनपीसीआई के अनुसार, क्यूआर कोड स्कैन करके यूपीआई दर्ज करना, भुगतान करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, पैसे प्राप्त करने का नहीं। भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले प्राप्तकर्ता का नाम और राशि जांचना बहुत जरूरी है। किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन दर्ज नहीं करें। कैशबैक या पुरस्कार के नाम पर आए अनजान लिंक और भुगतान अनुराधों से दूर रहना ही बेहतर है।

दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार
एक सवाल के जवाब में सुचरिता जी ने कहा दिया कि दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है, लेकिन इस दौरान आॅनलाइन खरीदारी, आकर्षक आॅफस और डिजिटल भुगतान के नाम पर साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ जाता है। परिवार के प्रत्येक सदस्य को फर्जी लिंक, संदिग्ध काॅल, नकली डिस्काउंट और ओटीपी साझा करने के जोखिमों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। मालूम हो कि साइबर ठग प्रसिध्द ई-काॅमर्स कंपनियों जैसी दिखने वाली वेवसाइट बनाते हैं। सोशल मीडिया पर 70 से 90 प्रतिशत छूट, बेहद कम कीमत पर महंगे मोबाइल या सीमित समय के विशेष आफर का विज्ञापन देकर ग्राहकों को इन वेबसाइटों तक पहुंचाया जाता है। ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन सामान नहीं पहुंचता। कुछ मामलों में वेबसाइट के जरिए निजी या वित्तीय जानकारी चुराने की कोशिश भी होती है, ऐसे में वेबसाइट का पूरा पता ध्यान से जांचें। किसी अनजान विज्ञापन के लिंक पर क्लिक करने के बजाए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एप खोलें।

वीडियो काॅल के जरिए धमकी
सुचरिता जी ने बताया कि अनेक बार नकली पुलिस अधिकारी बनकर सामने वाले को फोन के जरिए धमकाया जाता है। कहा जाता है कि आपको थाने आना होगा। फला आदमी ने आपके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। वीडियो काॅल के जरिए बाकायदा सामने पूरी वर्दी में वह अधिकारी होता है। भय के कारण लोग उसके आदेश का पालन भी करने लगते हैं। ऐसे लोगों के झांसे में अधिक उम्र के लोग भी आ जाते हैं। साइबर फ्राॅड एक ऐसी अवैध और आपराधिक गतिविधि है जिसमें धोखेबाज लोग कंप्युटर, इंटरनेट, स्मार्टफोन, नेटवर्क या डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करके लोगों के पैसे, निजी जानकारी या उनकी पहचान चुराते हैं।
हेल्पलाइन नम्बर पर करें काॅल
सुचरिता जी का कहना था कि यदि साइबर ठगी हो गई है तो पैसे वापस पाने के लिए सबसे ज़रूरी है, समय पर कदम उठाना, क्योंकि फ्राॅड के शुरूआती एक से दो घंटे ’गोल्डन आॅवर’ कहे जाते हैं, जो महत्वपूर्ण होते हैं। ठगाए व्यक्ति को चाहिए कि वह बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नम्बर 1930 नम्बर पर काॅल करें। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है।

प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित
पाँचडाली, रामकृष्णनगर, श्रीभूमि, असम में श्री सुभाषचंद्र सिंह एवं श्रीमती सुरधनि सिंह के घर जन्मी सुचरिता जी को लिखने की प्रेरणा अपने माता पिता से मिली। इनके पिता असम सरकार से पुरस्कृत साहित्यकार हैं और माता जी भी शास्त्रीय गायिका हैं। सुचरिता जी असम के जिला श्रीभूमि में शिक्षिका होने के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में लगातार भागीदारी निभाती रही हैं। आप मूल रूप से विष्णुप्रिया-मणिपुरी भाषा की लेखिका हैं, लेकिन बांग्ला और हिंदी साहित्य की भी जानका हैं और यहां तक कि इन भाषाओें के साहित्य का अनुवाद भी कर लेती हैं। इनका एकल कविता संकलन ’इमाराड़ मोर चिठि’ प्रकाशित एवं चर्चित है। भारतीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर वर्ष 2021-22 में आॅनलाइन अखिल भारतीय ’देशभक्ति गीत लेखन’ स्पर्घा आयोजित की गई थी जिसमें इन्होंने जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मान राशि और प्रमाण पत्र देकर इन्हें अलंकृत किया था। सुचरिता जी को और भी अनेक पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है जिनमें महिला काव्य सागर सम्मान (दिल्ली), मातृ शक्ति पुरस्कार (इंदौर), गीति स्वामी गोकुलानंद कला-कृष्टि केंद्र (गुवाहाटी), हिन्दी सेवी सम्मान (उत्तराखंड), साहित्य सेवी सम्मान, (राजस्थान) शामिल हैं।
भारतीय भाषाओं में अनुवाद
सुचरिता जी असम की ’शासकीय अनुवाद परियोजना प्रकाशन परिषद्’ की सदस्य हैं, इन दिनों आप इस योजना के अंतर्गत अनुवाद कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही ’झारखण्ड हिंदी साहित्य संघ’ के लिए ’हिंदी बालक रामायण कथा’ का विष्णुप्रिया-मणिपुरी भाषा में अनुवाद कर रही हैं। आप त्रिभाषी ’हमाजि’ नामक महिलाओं पर केंद्रित साहित्यिक पत्रिका की संपादक भी हैं। ’इंडो-बांग्ला विष्णुप्रिया, मणिपुरी एसोसिएशन’ ने वर्ष 2020 में ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया, उसमें इन्हें प्रथम स्थान मिला था। साथ ही देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ और लेख छपते रहते हैं।
सुचरिता सिंहा की कविताएँ
पूजा अधूरी
फूलों के बिना पूजा अधूरी
दिल के बिना प्यार अधूरा है
दुख के बिना खुशी का
अनुभव आम है
रात के बिना दिन का
क्या कोई मतलब है?
साधन के बिना मोक्ष पाना
नामुमकिन है।
प्रभु के बिना कितने-
कितने अकेले हैं हम!
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मैं लाचार हूँ
जितना ज्यादा मैं
खुशी के लिए भागती हूँ
उतना ही ज्य़ादा दुख
गले लगाता मुझे
प्यार से बगल में बैठने की
करता है जिद
मैंने उसे हज़ारों-
हज़ार बार बार भगाया है
फिर भी वह बेशर्मी से
मुझे मजबूत हाथों से
पकड़े रहता है
अब मैं कहती हूँ
ओ दुख, सुनो!
अगर तुम मुझसे इतना प्यार करते हो
तो मेरे लिए खुशी लाओ
मुझे थोड़ी शांति दो!
लेकिन वह कहाँ सुनता है?
मुझे नज़रअंदाज कर
वह सिर्फ मुझसे प्यार करता है
मैं क्या करूँ?
ओ दुख, मेरे दुख को थोड़ा
समझने की कोशिश करो
मैं लाचार हूँ
जिसे मैं चाहती हूँ वह नहीं मिल रहा
यही तो है मेरा दुख।
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जय माँ दुर्गा
सुबह की खुशबू पतझड़ की हवा
प्रकृति और माहौल कितना प्यारा है
दूर से पक्षियों की आवाज़
कैसे मन को घर जैसा
एहसास कराती है
पूजा की खुशबू पूरी
दुनिया को सुर और
लय से भर देती है
त्रिभुवन ढोल-नगाड़ों और
संगीत की ध्वनि से
एकाकार हो जाता है
माँ आ रही है, सब खुश हैं
कौन पराया है
कौन अपना है
कोई फ़र्क नहीं है
हर कोई माँ के स्पर्श से
जागना चाहता
हर कोई माँ के स्पर्श से
ऊर्जा पाना चाहता है
जय माँ दुर्गा
बुराइयों का नाश करने वाली
इस अधर्मी का भला करें।
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अपने लिए कुछ नहीं
इस दुनिया के
मेहमान हैं हम
फिर किस बात का
अभिमान?
किस बात का
घमंड?
हाँ...
मेरी एक दुनिया है
जिसके लिए मैं हूँ
अभिमान, स्वाभिमान
घमंड, कपट
सब उसी के लिए
अपने लिए कुछ भी नहीं
कुछ भी नहीं!
मैं खुद नहीं रोती
वह मुझे रुलाता
मैं खुद नहीं जलती
वह मुझे जलाता
बातों बातों में
इशारों-इशारों पे
वह मेरा दिल दुखाता।
उनके चेहरे का हर एक धब्बा
मेरी आँखों में तैरता है
वो चमकदार मुस्कान
निहारते हुए गहराई
माथे की झुर्रियाँ
भौंहों का उठना-नामना
होठों का छूना
सब कुछ.....
उसी पल में उसके शरीर की
सुगंध भी पास बहती चली आती
और मैं उस खुशबू का
पीछा करती रहती हूँ
आकांक्षा और अपेक्षा करते हुए
आज भी चिर नवीन।
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जीने का हक
मुझे भी हक है जीने का
समाज ने ठुकराई मेरी जिंदगानी
फिर भी जीने का हक है मुझे
मैं नारी हूँ
यह बार- बार नहीं जताया करो
इस दुनिया की हर चीज पर
मेरा भी समान अधिकार है
मुझसे जीने का हक मत छीनो
मेरे माता-पिता और समाज
इसे नहीं छीनो
हर सुख-दुख में मुझे सहारा दो
मैं भी इस दुनिया का
समस्त आनंद भोग सकूँ
मैं भी इस दुनिया के
हर रंग में
रंगकर जीवन जी सकूँ
जीयो और जीने दो।
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एक सागर की कहानी
उस पार वह रहता है
और इस पार मैं रहती हूंँ
यहाँ से आनेवाली आवाज
वहाँ नहीं पहुँचती
और वहाँ से आनेवाली आवाज
यहाँ नहीं पहुँचती
सागर का गहरा पानी
हमारी परछाइयों को
आपस में मिलने नहीं देता
एक रेगिस्तान की कहानी
आसमाँ में बादल हैं
और धरती पर रेत है
पानी की कमी के कारण
हम दोनों वहाँ नहीं रह पाते
एक ही धरती एक ही पवन
लेकिन आवाज़ अलग-अलग है
शायद यही जीवन
जीने का आधार है।

Hemant Bhatt