महिलाओं को मिला मंच तो भूल गई दुनिया का प्रपंच, गीत, नृत्य और विचारों की उम्दा प्रस्तुति ने महिलाओं में भरा जोश, जुनून और उत्साह 

महिलाओं को मिला मंच तो भूल गई दुनिया का प्रपंच, गीत, नृत्य और विचारों की उम्दा प्रस्तुति ने महिलाओं में भरा जोश, जुनून और उत्साह 

प्रोफेसर अजहर हाशमी के गीत "दुनिया से तो बहुत मिला तो खुद से भी तो मिल" की उम्दा प्रस्तुति ने किया ऊर्जा का संचार

⚫ अतिथियों के हाथों पुरस्कृत हुई महिलाओं चेहरे पर छाई खुशी

हरमुद्दा
रतलाम, 28 अप्रैल। महिलाओं के लिए महिलाओं द्वारा एक उम्दा आयोजन किया गया। महिलाओं को जैसे ही मंच मिला वे दुनिया के प्रपंच भूल गई। इतना ही नहीं अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि अन्य महिलाएं भी प्रेरित हुई। गीत, नृत्य और विचारों की उम्दा प्रस्तुति ने महिलाओं में जोश, जुनून और उत्साह का ऐसा संचार किया कि वे खुद को मिल सकी। खासकर कवि एवं चिंता प्रोफेसर अजहर हाशमी के गीत "दुनिया से तो बहुत मिला तो खुद से भी तो मिल" की उम्दा प्रस्तुति संगीता जैन द्वारा दी गई तो मौजूद तमाम के तन मन से झंकृत कर दिया।

दीप प्रज्वलन के साथ आयोजन का शुभारंभ करते हुए अतिथि

यह अनुकरणीय अद्भुत आयोजन हुआ भारत भारती के बैनर तले। भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विनय पत्राले, मध्य प्रदेश संयोजक डॉ. प्रवीणा दवेसर, संयोजिका एवं अधिवक्ता अदिति दवेसर के प्रयास “कभी खुद से भी तो मिल” का आयोजन किया गया। इसे मौजूद महिलाओं द्वारा खूब सराहा गया। प्रारंभ में अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन पश्चात वंदे मातरम गीत की प्रस्तुति दी गई।

मंचासीन अतिथि एवं संयोजक

कार्यक्रम को रोचक एवं जीवंत बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया।

प्रोफेसर हाशमी के गीत की प्रस्तुति देते हुए गायिका संगीता जैन

शहर की शख्सियत संगीता जैन द्वारा प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार अजहर हाशमी के गीत "दुनिया से तो बहुत मिला तो खुद से भी तो मिल" की संगीतमय प्रस्तुति देकर मौजूद को प्रेरित किया। प्रारंभ में अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन पश्चात वंदे मातरम गीत की प्रस्तुति दी गई।

इनका किया सम्मान

आयोजन में गृहकार्य सहयोगी महिलाओं ममता यादव, प्रीति, सुश्री राजू, रामकन्या, आशा, नेहा, अनीता, पार्वती, हीरा, ललिता, ज्योति एवं संगीता का विशेष रूप से सम्मान किया गया। अतिथियों के हाथों पुरस्कार पाते ही महिलाओं के चेहरे पर खुशियां छा गई।

यह थे उपस्थित

कार्यक्रम में भारत भारती की टीम के सदस्य प्रवीण रामावत, राकेश यादव, लगन शर्मा, दिवाकर भटेले, एडवोकेट राहुल सक्सेना, मीनाक्षी मलिक, सुरभि यादव, अर्पित पांडे, विक्रम चौधरी, सौरभ गुर्जर, सोनी श्रीवास्तव, रेनू दुबे सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। संचालन पत्रकार सुश्री अदिति मिश्रा ने किया। आभार मीनाक्षी मलिक ने माना।

अतिथि महिलाओं ने भी लिया अद्भुत आनंद, दी गीत की प्रस्तुति

आयोजन में प्रस्तुति देते हुए

आयोजन की मुख्य अतिथि कवि एवं लेखिका डॉक्टर पाखुरी वक्त, जिला पंचायत रतलाम की सीईओ वैशाली जैन, प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सविता दीदी मौजूद रही। अतिथि महिलाओं ने भी महिलाओं के लिए हुए आयोजन खुद से भी तो मिल का अद्भुत आनंद लिया और अनुभूतियों को व्यक्त किया। आईएएस सुश्री जैन ने स्वरचित रचना जो नारी की महत्ता के संबंध में है 'अहं ब्रह्मास्मि' भी प्रस्तुत की।        

स्वयं को समझने का किया प्रयास io

विशिष्ट अतिथि बीके सविता दीदी द्वारा राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया। महिलाओं ने आत्म संवाद के माध्यम से स्वयं को समझने और मानसिक शांति प्राप्त करने का प्रयास किया। इस सत्र ने उपस्थित महिलाओं को आंतरिक सशक्तिकरण का अनुभव कराया।

तो मिल सकता है जीवन में संतुलन और संतुष्टि

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वयं निर्णय लेने एवं प्रतिदिन कुछ समय अपने लिए निकालना ही चाहिए। यदि महिलाएँ आत्मचिंतन करें और स्वयं को प्राथमिकता दें, तो वे जीवन में संतुलन एवं संतुष्टि प्राप्त कर सकती हैं। 

सुश्री वैशाली जैन, आईएएस, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रतलाम

आत्म सम्मान के लिए जरूरी यह भी

महिलाएँ हर भूमिका निभाती हैं, परंतु स्वयं के लिए समय निकालना भी उतना ही आवश्यक है, इतना कि परिवार रिश्तेदार और समाज के लिए निकलते हैं। महिलाओं को जीवन में भावनात्मक संतुलन, बनाना चाहिए। आत्म सम्मान के लिए जीवन में “ना” कहना भी जरूरी है।

डॉ. पांखुरी वक्त, कवयित्री एवं लेखिका, उज्जैन

महिलाओं को ऐसा मंच देना था बेहद जरूरी

यह आयोजन महिलाओं को आत्मसंवाद के लिए प्रेरित करने तथा उन्हें स्वयं के लिए समय निकालने की दिशा में जागरूक करने के लिए किया गया है। महिलाएँ परिवार एवं समाज की जिम्मेदारियों में स्वयं को भूल जाती हैं, इसलिए उन्हें एक ऐसा मंच देना आवश्यक है, जहाँ वे अपने विचारों एवं भावनाओं को खुलकर अभिव्यक्त कर सकें।

अदिति दवेसर, संयोजक एवं अधिवक्ता

... और वह भी ला सकती जीवन में सकारात्मक परिवर्तन

यह कार्यक्रम मात्र एक आयोजन नहीं, बल्कि स्वयं से संवाद करने और आत्म पहचान, सम्मान की दिशा में एक सशक्त पहल है। आत्मनिरीक्षण के माध्यम से वे अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचान सकती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।

डॉ. प्रवीणा दवेसर, मध्य प्रदेश संयोजिका, भारत भारती

फोटो : लगन शर्मा