ईमानदारी और आत्मिक संतोष की मिसाल : 33 वर्ष बाद लौटाई मिली हुई राशि
⚫ जिन्हें लौटाई राशि वह निकले कॉलेज के ही मित्र
⚫ साथ में जो मित्र थे उनका हो गया स्वर्गवास
हरमुद्दा
रतलाम, 27 अप्रैल। भले ही राशि लौटाने में विलंब ही नहीं बहुत ज्यादा विलंब हुआ, मगर जो आत्मिक सुख और संतोष मिला वह अनुपम अद्वितीय है। मजेदार बात तो यह रही कि जो राशि जिन सज्जन को सौंपी वे कॉलेज के समय के ही मित्र निकले। यह घटना समाज के लिए ईमानदारी, पश्चाताप, जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल है।
यहां पर बात हो रही है जिला पंचायत के सहायक सांख्यिकी अधिकारी साकिर हुसैन मंसूरी की। बाद तीन दशक से अधिक समय पुरानी है यानी की 1993 की है।
अज्ञानता के चलते कर दिया ऐसा
रतलाम से जावरा मित्र के साथ जा रहे थे, तभी रास्ते में एक बैग मिला था। बैग खोलकर देखने पर उसमें लगभग ₹8000 नकद राशि तथा बिलबुक, रसीदें एवं अन्य कागजात मौजूद थे। उस समय अज्ञानतावश कागजात नष्ट कर दिए गए तथा नकद राशि को आपस में आधा-आधा बांट लिया गया।
वास्तविक मालिक तक पहुंचाने का आया मन में
समय बीतने के साथ मन में यह भावना लगातार बनी रही कि यह राशि किसी की अमानत थी और इसे उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना चाहिए। आत्मा की आवाज़ और अंतर्मन की प्रेरणा से वर्षों बाद संबंधित व्यक्ति की तलाश शुरू की गई। लंबे प्रयासों के बाद आखिरकार उस राशि के वास्तविक मालिक का पता चल गया।
साथ में जो मित्र थे उनका हो गया स्वर्गवास
इस बीच उस समय साथ रहे मित्र का स्वर्गवास हो चुका था। इसलिए उनके हिस्से सहित संपूर्ण राशि आज संबंधित मालिक साईं दीप मेडिकल एजेंसी के बालकृष्ण जी जो सौंपी। इत्तेफाक से मेरे कॉलेज की मित्र निकल गए। उनसे विनम्रतापूर्वक क्षमा याचना की।
गलती पर अंतर्मन देता है संकेत
राशि लौटाने वाले व्यक्ति ने कहा कि यदि इंसान से कोई गलती हो जाए, तो उसका अंतर्मन उसे लगातार संकेत देता रहता है। सच्चा सुकून तभी मिलता है जब व्यक्ति अपनी गलती को स्वीकार कर उसे सुधारने का साहस दिखाए। यह घटना समाज के लिए ईमानदारी, पश्चाताप, जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल है।
Hemant Bhatt