साहित्य सरोकार : कायनात की ख़ूबसूरत इबारत है स्त्री
⚫ डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने कहा
⚫ जनवादी लेखक संघ का ' कविता में स्त्री ' आयोजन
हरमुद्दा
रतलाम, 26 अप्रैल। स्त्री सक्षम है , सबल है और संवेदनशील भी। उसकी अपनी सोच है , अपनी वैचारिकता है और अपना परिवेश। स्त्री को अबला समझने वाला समाज अब उसे सबल स्वीकार रहा है । स्त्री कायनात की सबसे खूबसूरत इबारत है । उसके होने से पूरी दुनिया में रौनक है।

यह विचार शिक्षाविद डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'कविता में स्त्री' की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक महिला दूसरी महिला का दर्द समझती है । हर महिला का अपना लोकतंत्र होता है । इसमें कहीं उपेक्षा नहीं होती । किसी की अवहेलना नहीं होती। सभी समान रूप से, भावनात्मक रूप से एक दूसरे से संबंद्ध होती हैं। स्त्री के इस लोकतंत्र को आज का पुरुष वर्ग भी स्वीकार रहा है, यही स्त्री के सशक्त होने की पहचान है।
कविताओं में नारी की उपस्थिति मजबूती से
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. गीता दुबे ने कहा कि नारी को अलग-अलग नाम से और अलग-अलग भूमिकाओं से पहचाना जाता रहा है। नारी हर भूमिका में अपने आप को श्रेष्ठ साबित करती रही है। कविताओं में नारी की उपस्थिति बहुत मज़बूती से हो रही है। आज की युवा पीढ़ी भी लेखन के क्षेत्र में बहुत मुस्तैदी से आगे बढ़ रही है।
फिर भी करती आदर्श उदाहरण प्रस्तुत
कवयित्री इन्दु सिन्हा ने इस अवसर पर कहा कि स्त्री के अपने दर्द होते हैं मगर वह इन सबसे परे हटकर समाज के सामने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती है। वह समाज को बेहतर बनाना चाहती है इसीलिए अपने दर्द को छुपा कर मुस्कान बिखेरती है। योगिता राजपुरोहित ने कहा कि स्त्री का अपना महत्व है । वह किसी भी रूप में समाज के सामने अपना प्रबल पक्ष रखती रही है।
*महिलाओं ने किया रचना पाठ*
आयोजन में नारी विषयक कविताओं का पाठ महिला रचनाकारों ने किया। रचना पाठ करने वालों में वरिष्ठ रचनाकार पुष्पलता शर्मा, डॉ. गीता दुबे, डॉ. पूर्णिमा शर्मा,रचना चंद्रावत, पूजा चौपड़ा, इंदु सिन्हा, नीता गुप्ता, आशा श्रीवास्तव, कीर्ति पंवार, अलका तिवारी, गीता राठौर ने स्त्री विषय की रचनाओं का पाठ करते हुए नारी के विभिन्न रूपों को अभिव्यक्त किया।
इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान , रंगकर्मी ओम प्रकाश मिश्रा , डॉ.एन. के .शाह, आई.एल. पुरोहित, सुभाष यादव, नरेंद्र सिंह डोडिया, लक्ष्मण पाठक, प्रकाश हेमावत, कैलाश वशिष्ठ ,कीर्ति शर्मा, जवेरीलाल गोयल, हीरालाल खराड़ी, अनीस खान ,आशीष दशोत्तर सहित सुधि रचनाकार मौजूद थे। संचालन योगिता राजपुरोहित ने किया। आभार जनवादी लेखक संघ के सचिव रणजीत सिंह राठौड़ ने माना ।
अगला आयोजन 10 मई को
जनवादी लेखक संघ की श्रृंखला 'एक रचनाकार का रचना संसार' के अंतर्गत शहर के वरिष्ठ रचनाकार रहे ललिता शंकर सुरोलिया की रचनाओं का पाठ एवं उन पर बातचीत 10 मई रविवार को प्रातः 11 बजे भगत सिंह पुस्तकालय शहर सराय रतलाम पर होगी। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ जावेदी जी ने शहर के सभी सुधिजनों से उपस्थित का आग्रह किया है।
Hemant Bhatt