सेहत सरोकार : शरीर, मन और आत्मा पर संतुलन स्थापित करना सिखाता है योग

सेहत सरोकार : शरीर, मन और आत्मा पर संतुलन स्थापित करना सिखाता है योग

डॉ. दिलीप नलगे ने कहा

⚫ "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग" विषय पर कार्यक्रम का आयोजन 

⚫ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के दिव्य दर्शन भवन में आयोजन

हरमुद्दा
रतलाम, 19 जून। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, रतलाम के डोंगरे नगर स्थित सेवाकेंद्र "दिव्य दर्शन भवन" में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग" (Yoga for One Earth, One Health) विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पं. शिवशक्तिलाल शर्मा आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलीप नलगे ने अपने प्रेरणास्पद विचार रखते हुए कहा
"योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली है जो हमें शरीर, मन और आत्मा – तीनों स्तरों पर संतुलन स्थापित करना सिखाता है। आज मानवता जिन मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रही है, उनके समाधान का मार्ग योग के माध्यम से ही निकल सकता है। 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' का सिद्धांत तभी संभव है जब हर व्यक्ति आंतरिक रूप से स्वस्थ और संतुलित हो।" 

योग, ध्यान और स्व-अनुशासन को दें समय

डॉ. नलगे ने युवाओं और विद्यार्थियों से अपील की कि वे प्रतिदिन कुछ समय योग, ध्यान और स्व-अनुशासन को दें, ताकि वे न केवल शारीरिक रूप से फिट रहें, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बन सकें। पूरे वर्ष में 21 जून का दिन सबसे बड़ा होता है इसलिए इस दिन को योग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। योग जीवंतता का प्रतीक है यह जीवन की ऊर्जा का बढ़ाने वाला है भारतीय दर्शन सर्वे के सुख की कामना करता है।

नकारात्मक और व्यर्थ विचारों से बचे सभी

राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी आरती दीदी ने कहा कि योग शब्द का अर्थ होता है जोड़ना। आध्यात्मिक के संदर्भ में आत्मा का संबंध परमात्मा से जोड़ना ही सच्चा योग है। योग दिवस मनाने से लोगों में योग के प्रति जागरूकता बड़ी है। नकारात्मक और व्यर्थ विचारों से बचने की सलाह देते हुए कहां की इससे आत्मा की शक्ति नष्ट होती है। अंत में उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों को राजयोग का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया। कार्यक्रम में सभी को सूर्य नमस्कार, योगासन और प्राणायाम कराया गया।