रतलाम में लापरवाही की भेंट चढ़ा एक और चिराग, 11वीं के छात्र की डूबने से मौत
⚫ स्कूल की जगह तालाब पहुंचे छात्र
⚫ रेस्क्यू पर उठे सवाल
हरमुद्दा
रतलाम, 24 सितंबर। एक तरफ जहां शिक्षा का मंदिर बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है, वहीं दूसरी तरफ स्कूली बच्चों की मनमानी और स्कूल बंक (तड़ी मार) करने की आदत मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। गुरुवार को औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत हनुमान ताल में घटी एक दर्दनाक घटना ने परिजनों के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक ढांचे और स्कूल प्रबंधन को हिलाकर रख दिया है।

न्यू रोड स्थित गुजराती स्कूल में पढ़ने वाले छह छात्र सुबह यूनिफॉर्म पहनकर और पीठ पर बैग टांगकर घर से तो पढ़ाई के लिए निकले थे, लेकिन स्कूल जाने के बजाय मस्ती करने हनुमान ताल पहुंच गए। तालाब में नहाने उतरे इन छात्रों में से 11वीं कक्षा का छात्र मंगल (पिता गजराज राजपूत, निवासी ग्राम घटला भटुनि) गहरे पानी में समा गया और उसकी जान चली गई। साथ गए अन्य पांच साथी छात्र—विशाल, रोशन, ऋतिक, शिवराज और पृथ्वीराज सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन मंगल जिंदगी की जंग हार गया।
विनोद ने छलांग लगाकर निकला मंगल को
प्रत्यक्षदर्शियों ने दिखाई इंसानियत, पर गहरा पानी बना काल
घटना के समय किनारे मौजूद लक्की जैकप, जाकिर भाई और विनोद ने छात्र को डूबते देख तुरंत बचाने का प्रयास किया। विनोद ने अपनी जान जोखिम में डालकर तालाब में गोता भी लगाया, लेकिन मंगल का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने औद्योगिक क्षेत्र थाने पहुंचकर पुलिस को अलर्ट किया।
SDRF की कार्यप्रणाली पर फूटा गुस्सा

सूचना मिलने पर पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सरकारी तंत्र की लापरवाही और ढुलमुल रवैया साफ देखने को मिला। करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद भी जब SDRF टीम छात्र को ढूंढने में नाकाम रही, तो परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।
5 मिनट में निकाल लाया ग्रामीण ढूंढ कर
ग्रामीणों ने खुद तालाब में छलांग लगाई और महज 5 मिनट के भीतर मंगल को ढूंढकर बाहर निकाल लिया। आनन-फानन में छात्र को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने रेस्क्यू टीम की दक्षता और तैयारियों पर कड़ा आक्रोश जताया।
बड़ा सवाल: बच्चों की मनमानी, अभिभावकों की बेरुखी और स्कूल प्रबंधन की ढील
इस हृदयविदारक घटना ने कई ऐसे गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिन पर अब शहरवासियों, स्कूल प्रशासन और अभिभावकों को मिलकर सोचने की जरूरत है।
क्या स्कूल बंक करने की जानकारी परिजनों को नहीं होती?
अक्सर छात्र घर से यूनिफॉर्म पहनकर निकलते हैं, लेकिन स्कूल नहीं पहुंचते। स्कूल प्रशासन को अनुपस्थित छात्रों के परिजनों को तत्काल एसएमएस या कॉल के जरिए सूचित करने का सख्त सिस्टम लागू करना चाहिए।
सूनसान और खतरनाक जलस्रोतों पर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं?
शहर के आसपास बने तालाबों और जल निकायों पर सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड या होमगार्ड की तैनाती क्यों नहीं की जाती?
SDRF की घटिया कार्यप्रणाली का जिम्मेदार कौन?
जिस काम को ग्रामीणों ने 5 मिनट में अंजाम दिया, वहां एक घंटे तक सरकारी मशीनरी का विफल रहना आपातकालीन सेवाओं की ट्रेनिंग और उपकरणों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
जरूरी कड़ी नजर
माता-पिता अपने बच्चों की दिनचर्या पर कड़ी नजर रखें। बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं, इसकी नियमित पुष्टि करें। जरा सी लापरवाही और मौज-मस्ती किसी परिवार का इकलौता चिराग बुझा सकती है।
Hemant Bhatt