जमीनी रंजिश में वृद्ध की हत्या करने वाले पिपलोदा जनपद उपाध्यक्ष सुरेश जाट सहित 8 दोषियों को आजीवन कारावास, कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना

जमीनी रंजिश में वृद्ध की हत्या करने वाले पिपलोदा जनपद उपाध्यक्ष सुरेश जाट सहित 8 दोषियों को आजीवन कारावास, कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना

न्यायालय का बड़ा फैसला: प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया निर्णय

⚫  24 जनवरी 2024 को हुई घटना में अभियोजन की प्रभावी पैरवी से मिला न्याय

⚫ राहुल, कपिल दोनों भाई और अवतार, विक्रम दोनों भाई  को भी सजा

हरमुद्दा
​जावरा/रतलाम, 13 अगस्त। पुरानी रंजिश को लेकर एक वृद्ध की बेरहमी से मारपीट कर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। श्रीमान जंगबहादुरसिंह राजपूत, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महोदय, जावरा (जिला रतलाम) ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए सभी 8 आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। इस फैसले में में दो-दो सगे भाई को भी सजा मिली है।


​मामला थाना पिपलोदा क्षेत्र के ग्राम कंचनखेड़ी का है। 24 जनवरी 2024 को सुबह लगभग 11 बजे फरियादी विकास चौधरी और उसके मामा जितेंद्र जाट अपने खेत पर गेहूं की फसल में पानी देने के लिए पाइप फैला रहे थे। इसी दौरान उनके रिश्ते के नाना नाथूलाल चौधरी खेत की ओर जा रहे थे।
​पुरानी रंजिश के चलते गांव के ही सुरेश जाट और उसके अन्य साथियों ने लोहे की टामियों, लोहे के पाइपों, लाठी और डंडों से लैस होकर नाथूलाल जी पर जानलेवा हमला बोल दिया। फरियादी व अन्य के मौके पर पहुंचने पर आरोपी वहां से फरार हो गए। हमले में गंभीर रूप से घायल नाथूलाल जी को इलाज के लिए पहले सिविल अस्पताल जावरा और फिर मेडिकल कॉलेज रतलाम ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

​इन 8 दोषियों को मिली सजा

सुरेश जाट पिता भंवरलाल जाट (उम्र 42 वर्ष) पिपलोदा जनपद उपाध्यक्ष

राहुल जाट पिता बाबूलाल जाट उर्फ पालीवाल (उम्र 30 वर्ष)

कपिल जाट पिता बाबूलाल उर्फ पालीवाल (उम्र 27 वर्ष)

​विकास जाट उर्फ भुरा पिता रमेश जाट (उम्र 24 वर्ष)

सुभाष जाट पिता रमेश जाट (उम्र 30 वर्ष)

बलराम जाट पिता भरतलाल जाट (उम्र 34 वर्ष)

अवतारसिंह जाट पिता कैलाश जाट (उम्र 32 वर्ष)

विक्रम जाट पिता कैलाश जाट (उम्र 34 वर्ष)


(सभी निवासीगण: ग्राम कंचनखेड़ी, थाना पिपलोदा)
​न्यायालय का कड़ा रुख और सजा का ऐलान
​मध्य प्रदेश शासन द्वारा इस गंभीर अपराध को "चिन्हित श्रेणी" (Highlighted Case) में रखा गया था। विवेचना अधिकारी अप निरीक्षक के.एल. दायमा और उनि. लोकेंद्रसिंह डावर द्वारा विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया था।
​मामले में प्रस्तुत दस्तावेजी, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एवं मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर माननीय न्यायालय ने 12 अगस्त 2026 को अंतिम निर्णय सुनाया।

इन धाराओं में मिली सजा

धारा 302/149 भादवि (हत्या एवं बलवा): सभी 8 दोषियों को आजीवन कारावास एवं ₹20,000-₹20,000 का अर्थदंड।
​धारा 148 भादवि (घातक हथियारों से बलवा): सभी 8 दोषियों को 03-03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹5,000-₹5,000 का अर्थदंड।
​कुल जुर्माना: प्रकरण में सभी दोषियों पर कुल ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है।

​अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी

प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पारस एवं विशेष लोक अभियोजक  अमित कुमार छारी ने पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों और अकाट्य तर्कों के बल पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को कठोर दंड सुनाकर पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाया।