सृजन अभी-अभी : मौसम का मिज़ाज...
मौसम का मिजाज बदलता रहता है, कभी धूप निकलती है, तो कभी बारिश होती है। यह मौसम की प्रकृति है, जिसमें तापमान, आर्द्रता और हवा के दबाव जैसे कारक लगातार बदलते रहते हैं, जिससे हमें विभिन्न मौसम अनुभव होते हैं।
⚫ प्रोफ़ेसर अज़हर हाशमी
आदमी ने तोड़ डाला प्रकृति की लय का स़ाज,
स्वार्थवश कुदरत से कर पाया न रिश्तों का लिहाज़।

हर दिन झपट्टा प्रकृति पर मारता यों आदमी,
जैसे चिड़िया पर झपट्टा मारता है कोई बाज़।
राजनीति की तरह ऋतुएं बदलने लग गई हैं,
यानी नेता की तरह मौसम का बदला है मिज़ाज।
प्रकृति से छेड़ख़ानी का है मतलब आपदाएं,
इसलिए आती सुनामी और कहीं गिरती है गाज।
प्रकृति की ही सेहत पर है ‘सेहत’ निर्भर सभी की,
प्रकृति से दोस्ती में ही छिपा, खुशियों का राज़।

⚫ प्रोफ़ेसर अज़हर हाशमी
Hemant Bhatt