विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की हुंकार
"मैदानी स्तर पर कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार भारी मानसिक तनाव और असुरक्षा के माहौल में काम कर रहे हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों और पर्याप्त स्टाफ के कार्य कराना प्रबंधन स्तर की विफलता है। 7 दिनों में मांगें पूरी न होने पर इंदौर मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।"
⚫ 8-सूत्रीय मांगों को लेकर प्रबंधन को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
⚫ कंपनी मुख्यालय, पोलो ग्राउंड (इंदौर) में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
हरमुद्दा
रतलाम, 19 अक्टूबर। मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वृत्त कार्यालय रतलाम के अंतर्गत आउटसोर्स कर्मचारियों के विधिक दायित्वों, सुरक्षा, अनुबंध नियमों और नवीन स्वीकृत संगठनात्मक ढांचे (OS) को लागू करने की मांग को लेकर मैदानी अधिकारियों व कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों की सुरक्षा एवं विधिक संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए प्रबंधन के समक्ष 8-सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया गया है।

प्रबंध निदेशक मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के नाम मांग पत्र अधीक्षण यंत्री (संचारण एवं संधारण), मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को सौपा। इसके पहले बिजली अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति रतलाम के अधिकारी कर्मचारी रैली के रूप में कार्यालय पर आए जहां पर नारेबाजी करते हुए ठेका प्रथा बंद करने की मांग की।
यह रहे मौजूद
बिजली अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति यूनाइटेड फोरम से अध्यक्ष अमित डेम्बरा, बीएमएस संगठन से मोहनलाल जाधव व राजेश जोशी, पीईईए (PEEA) संगठन से कार्यपालन यंत्री महेंद्र मैड़ा, अजाक्स से राकेश सिहार, तकनीकी संगठन से समरथ बागड़ी, कार्यपालन यंत्री महेंद्र मैडा, ओपी सेन, QQविक्रांत ठाकुर, महेंद्र शंकर दीक्षित, सहायक यंत्री महेंद्र जैन, कल्पेश औदीच्य, राजन रंगीला, बिजली अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

7 दिन के अंदर सकारात्मक कार्रवाई की मांग
अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए उचित निराकरण नहीं किया गया, तो कंपनी मुख्यालय, पोलो ग्राउंड (इंदौर) में अनिश्चितकालीन काम बंद कर विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें कंपनी अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के अधिकारी-कर्मचारी हिस्सा लेंगे।
मांग पत्र के प्रमुख 8 बिंदु
अनधिकृत कर्मियों से कार्य न कराने का निर्णय: लाइन एवं तकनीकी कार्य केवल विधिक रूप से अधिकृत (Authorized) और कुशल (Skilled) श्रेणी के कार्मिकों से ही कराया जाए। अनधिकृत कर्मियों से कार्य कराने के कारण होने वाले किसी भी व्यवधान या विलंब की पूरी जिम्मेदारी एजेंसी व कंपनी प्रबंधन की होगी।
जोखिम स्वीकृति एवं क्षतिपूर्ति शपथ-पत्र (Risk Indemnity Clause): आउटसोर्स अनुबंध में स्पष्ट उल्लेख हो कि ऊर्जा विभाग का कार्य अत्यंत जोखिमपूर्ण है। किसी भी दुर्घटना, जान-माल की हानि या विकलांगता की स्थिति में समस्त विधिक व वित्तीय जवाबदेही एजेंसी और संबंधित कर्मी की होगी। सुरक्षा उपकरणों (T&P) का शत-प्रतिशत उपयोग अनिवार्य हो तथा अधिकारियों पर अनुचित दबाव या दोषारोपण न हो।
8 घंटे की मानक ड्यूटी: श्रम नियमों के अनुसार कर्मियों से अधिकतम 8 घंटे ही कार्य लिया जाए और आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं।
₹50 लाख का दुर्घटना बीमा: कार्य के जोखिम को देखते हुए प्रत्येक तकनीकी आउटसोर्स कर्मी का अनिवार्य रूप से ₹50 लाख तक का व्यापक दुर्घटना व जीवन बीमा कराया जाए।
विद्युत दुर्घटनाओं पर विधिक संरक्षण: दुर्घटना के उपरांत उग्र भीड़ या उपद्रवियों द्वारा अधिकारियों के घेराव, धमकी व दबाव की घटनाओं पर कंपनी कठोर कानूनी कार्रवाई करे तथा टेंडर अनुबंध की कंडिका 14.6 के तहत पुलिस व अदालती प्रक्रिया का दायित्व एजेंसी निभाए।
लापरवाही पर एजेंसी से स्पष्टीकरण: वृत्त क्षेत्र में होने वाली दुर्घटनाओं एवं सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर संबंधित आउटसोर्स एजेंसी को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाबदेही तय की जाए।
रात्रि कार्य हेतु अतिरिक्त श्रमिक: आपातकालीन ब्रेकडाउन व रात्रि कालीन कार्यों के लिए प्रत्येक केंद्र/जोन पर 4 अतिरिक्त श्रमिक (2 Skilled एवं 2 Semi-skilled) अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएं।
नवीन स्वीकृत OS अनुसार पदस्थापना: कंपनी के नवीन स्वीकृत ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर (OS) के अनुसार सभी कार्यालयों में स्वीकृत पदों पर अधिकारी-कर्मचारी तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध न कराने तक किसी भी दुर्घटना या कार्य-विलंब के लिए मैदानी अधिकारियों को दोषी न माना जाए।
संघटना का कड़ा संदेश
"मैदानी स्तर पर कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार भारी मानसिक तनाव और असुरक्षा के माहौल में काम कर रहे हैं। बिना सुरक्षा उपकरणों और पर्याप्त स्टाफ के कार्य कराना प्रबंधन स्तर की विफलता है। 7 दिनों में मांगें पूरी न होने पर इंदौर मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।"
फोटो : लगन शर्मा
Hemant Bhatt