फैसला : तलवार और फरसी से हत्या करने वाले पिता पुत्र सहित तीन आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

फैसला : तलवार और फरसी से हत्या करने वाले पिता पुत्र सहित तीन आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

मामला चार वर्ष पूर्व का

⚫ आम के पेड़ से केरी तोड़ने की बात पर हुआ था विवाद

⚫ उपचार के दौरान हो गई थी मौत

हरमुद्दा
रतलाम, 12 अगस्त। तलवार और फरसी से हत्या करने वाले पिता पुत्र और काका को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अर्थ दंड से दंडित किया गया। 


अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया कि आरोपी भेरूलाल पिता शंकरलाल देवदा भील (54), गुड्डा उर्फ नानालाल उर्फ रतनलाल पिता शंकरलाल देवदा (52) और मुकेश पिता भेरूलाल देवदा भील, उम्र 22 वर्ष, तीनों निवासी ग्राम कमेड़, थाना बिलपांक, जिला-रतलाम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 में आजीवन कारावास, धारा 324/34 में 6 माह का सश्रम कारावास व आर्म्स एक्ट की धारा 25 में 1 वर्ष का कारावास सुनाई। सभी आरोपियों पर 1 लाख 6800 रुपए जुर्माना भी लगाया गया। आरोपी पिता पुत्र और काका है।

यह हुआ था मामला

अपर लोक अभियोजक श्री पाटीदार ने बताया कि
फरियादी बलराम ग्राम रूनिजा में रहकर चाय की दुकान पर मजदूरी करता है। 05 जून 2021 को वह दादा शंभुलाल पिता मानाजी खदेडा व उसके मामा अमरसिंह पिता डुंगरसिंह निवासी खरगापाडा के साथ धनसेरा वाले खेत पर आम के पेड़ से केरी उतारने गए थे। दिन में करीबन 1:30 बजे भेरूलाल फरसी वाली लकड़ी तथा नानालाल तलवार लेकर आए और बोले कि आम का पेड़ उनका है। इसलिए आम से केरी नहीं उतारने देंगे।

अपशब्द कहते हुए की मारपीट

फरियादी बलराम ने बताया कि अभियुक्त गालियां देने लगे। उसके दादा जी शंभुलाल व उसने गालियां देने से मना किया तो वे उसके दादाजी से मारपीट करने लगे। तभी अभियुक्त मुकेश पिता भेरूलाल देवदा हाथ में लकडी, गुड्डा देवदा हाथ में तलवार व रोहित हाथ में लकडी लेकर आए। अभियुक्त मुकेश ने तलवार उसके सिर पर मारी तो उसके सिर से खून निकलने लगा। अभियुक्त गुड्डा व रोहित ने लकड़ी से उसे व उसके दादाजी शम्भुलाल जी व मामा अमर सिंह के साथ मारपीट की। उसके दादा बेहोश हो गए थे। उसके दादा शम्भुलाल देवदा ज्यादा गंभीर होने से अहमदाबाद अस्पताल ले गए थे, जहां ईलाज के दौरान मृत्यु हो गई। 

पुलिस ने किया आरोपियों को गिरफ्तार

फरियादी बलराम द्वारा उपरोक्त आशय की सूचना थाना बिलपांक में देने पर अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 323 व 506 में FIR दर्ज की गई। मृत्यु होने के पश्चात पर मर्ग क्रमांक 52/21 अंतर्गत 174 दं.प्र.सं. पंजीबद्ध कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। 

तर्क और सबूत के आधार पर सुनाई सजा

जांच के दौरान आए साक्ष्य के आधार पर धारा 324, 302 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 (1-बी) (बी) का ईजाफा कर आवश्यक अनुसंधान पश्चात् अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया। तर्क और सबूत के आधार पर न्यायाधीश राजेश नामदेव ने सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी अपार लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने की।