जानकारी सरोकार : 168 वर्ष पुराना इतिहास है भारतीय ध्वज का
⚫ डॉ. प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ इतिहासकार
आज जब हम घर घर तिरंगा फहरा रहे हैं, उसके स्वाभिमान और गर्व का इतिहास 1857 से चला आ रहा है। जब स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत का राष्ट्र ध्वज बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन आंदोलन असमय ही समाप्त हो गया, तब क्रांतिकारियों ने बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में हरे सफेद रंग के ध्वज को प्रतीक बनाया था जिसमें कमल का फूल और एक तरफ रोटी बनी हुई थी, जो क्रांति के प्रतीक थे, लेकिन प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद युग में उनकी शिष्य भगिनी निवेदिता ने 1904 में बनाया, जिसे प्रथम ध्वज कहते हैं।

इसे पहली बार 1906 में कलकत्ता के ग्रीन पार्क में कांग्रेस अधिवेशन में फहराया गया था। लाल पीले हरे रंग की पत्तियां थी और उन पर आठ कमल, चांद और सूरज बने थे तथा बीच में वंदे मातरम लिखा हुआ था। द्वितीय ध्वज पेरिस में मेडम कामा और निर्वासित क्रांतिकारियों ने 1907 में फहराया था। थोड़ा ही अंतर था। फिर 1917 में एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने डिजाइन किया और क्रांति का प्रतीक बनाया। इस तरह 1857 से लेकर 1947 तक 8 बार क्रांतिकारियों ने ध्वज बदले।

168 वर्ष की क्रांतिकारी यात्रा के बाद 1947 में राष्ट्रीय ध्वज ने स्वतंत्र भारत की नींव रखी। एक उल्लेखनीय बात है कि पहले ही ध्वज से कमल प्रतीक बना जो उत्तरोत्तर उन्नति का प्रतीक था।आज के इस तिरंगे ध्वज की रचना वेंकैया पिंगले ने की थी, उन्होंने तीस विभिन्न देशों के ध्वज पर शोध किया और 1921 के विजयवाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी जी को कृति बताई जिसमें कल और हरा रंग था। बाद में केसरिया, हरे, सफेद रंग की तीन समान पट्टियां शामिल की।

22 जुलाई1947 में आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में इसे अपनाया गया।लेकिन एक भारतीय कलाकार सुरैया तैयबजी ने 1931 के अधिवेशन में चरखे की जगह सारनाथ के अशोक स्तंभ के नीले रंग की 24 तीलियों वाले अशोक चक्र को जोड़ कर राष्ट्रीय ध्वज की रचना में अमर योगदान दिया। केसरिया रंग शौर्य का, बीच में श्वेत रंग धर्म चक्र के साथ शांति का और सबसे नीचे हरा रंग कृषि, हरियाली समृद्धि का प्रतीक बना। यूं तिरंगे में अशोक चक्र में नीला रंग भी है जो सकारात्मकता का प्रतीक है।अशोक चक्र 24 प्रहर और 24 गुणों के साथ भारत को सदा प्रगति के पथ पर चलते रहने का संदेश है।
अशोक अखंड भारत के महान शासक थे। इसलिए वो भी इस चक्र से अजर अमर हो गए। याद रहे हम तिरंगा ले कर चलें व घर में फहराएं तो यह न भूलें कि विश्व के सबसे गौरव शाली इतिहास और वर्तमान के महान देश भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के संप्रभु 193देशों के झंडों के बीच भारत का भी झंडा शान से फहरा रहा है।

जय हिंद
Hemant Bhatt