सृजन अभी-अभी : भारत में अद्वैत का, दर्शन जिनके नाम, उन आदि गुरु शंकर को, श्रद्धा सहित प्रणाम
आद्यगुरु शंकराचार्य भारत के एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक और योगी थे। उन्होने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया। भगवद्गीता, उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। सांख्य दर्शन का प्रधानकारणवाद और मीमांसा दर्शन के ज्ञान-कर्मसमुच्चयवाद का खण्डन किया।
⚫ प्रोफ़ेसर अज़हर हाशमी
भारत में अद्वैत का, दर्शन जिनके नाम।
उन आदि गुरु शंकर को, श्रद्धा सहित प्रणाम।।

केरल से कश्मीर तक, इनका पुण्य प्रताप।
ओंकारेश्वर दीक्षा, जिन पर यह शुचि छाप।।
माया और ब्रह्म अलग नहीं हैं, वे हैं एक।
निर्गुण-सगुण उपासना, दोनों सहित विवेक।।
चार मठों की स्थापना, आद्य गुरु के नाम।
भारतीय संस्कृति में, पवित्र सनातन धाम।।
कहा आदि गुरु ने दिव्य, कृपा का जिस पर हाथ।
मिले उसे मनुष्यत्वम्, महापुरुष का साथ।।

⚫ प्रोफ़ेसर अज़हर हाशमी
Hemant Bhatt