शिक्षा सरोकार : "वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका" विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार रतलाम में
⚫ शासकीय कन्या महाविद्यालय में 20 एवं 21 फरवरी को आयोजन
⚫ देश-विदेश के विद्वान वक्ता करेंगे संबोधित
⚫ प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे शोधपत्र
⚫ भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना ही सेमिनार का उद्देश्य
हरमुद्दा
रतलाम, 18 फरवरी। "वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका" विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 20 एवं 21 फरवरी को रतलाम में होगा।
शासकीय कन्या महाविद्यालय में होने वाले सेमिनार में देश-विदेश के विद्वान ऑनलाइन व ऑफलाइन व्याख्यान से सभी प्रतिभागियों को लाभान्वित करेंगे। प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र किए जाएंगे

शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर मंगलेश्वरी जोशी ने हरमुद्दा को बताया कि सेमिनार का उद्घाटन सत्र कलेक्टर सुश्री मिशा सिंह एवं रेल मंडल प्रबंधक अश्वनी कुमार के आतिथ्य में 20 फरवरी को सुबह 10 होगा। अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना, शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करना, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अन्तरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।
प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे देश-विदेश से विद्वतजन
व्याख्यान के लिए दिल्ली, मुंबई, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, यूएसए, स्वीडन से विद्वान वक्ता ऑनलाइन व ऑफलाइन जुड़कर सभी प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।
प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे शोधपत्र
आयोजन समिति के डॉक्टर माणिक डांगे, डॉक्टर तबस्सुम पटेल, डॉक्टर सुरेश चौहान, डॉक्टर वीएस बामनिया ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग भोपाल द्वारा प्रायोजित सेमिनार के अंतर्गत चार सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, वसुधैव कुटुम्बकम: वैश्वीकरण के भारतीय दृष्टिकोण, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं बौद्धिक संपदा अधिकार, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं तकनीकी विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पर्यावरण चेतना, आधुनिक आहार में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका, बाल पालन पोषण की प्रथाएं और भारतीय ज्ञान परंपरा, योग एवं आयुर्वेद की वैश्विक युग में भूमिका, भारतीय सांस्कृतिक समरसता में विभिन्न दार्शनिकों की भूमिका, लोक कला लोक संगीत एवं लोक संस्कृति का वैश्विक प्रभाव, भारतीय साहित्यिक परंपरा एवं आधुनिक साहित्य आदि विषयों पर विभिन्न महाविद्यालयों से ने वाले प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी द्वारा शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
होगा सेमिनार के निष्कर्ष पर विचार विमर्श
21 फरवरी को समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। सेमिनार के निष्कर्षों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजकों ने अधिकाधिक शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों से सेमिनार में सहभागिता का आह्वान किया है।
नवाचार का सशक्त मंच
डॉ. जोशी ने बताया कि अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार "वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका" विषय को वैश्विक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इसके माध्यम से भारतीय ज्ञान की भूमिका, शोध की संभावनाएँ तथा सांस्कृतिक दृष्टि का व्यापक प्रसार होगा। यह आयोजन शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए संवाद, विचार-विनिमय और नवाचार का सशक्त मंच प्रदान कर भारतीय ज्ञान परंपरा को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में सहायक बनेगा।
इनकी रहेगी मौजूदगी
⚫ डॉ. एच एल अनिजवाल, अतिरिक्त संचालक, उज्जैन सम्भाग, उज्जैन (म.प्र)
⚫ डॉ. वाय के मिश्रा, प्राचार्य, PMCOE शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रतलाम (म.प्र)
⚫ डॉ. प्रदीप खरे, प्राध्यापक दर्शनशास्त्र, सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या खातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल
⚫ डॉ. कल्पना सिंह, प्राचार्य, पीएमसीओई शासकीय माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, उज्जैन
⚫ प्रहलाद पटेल, महापौर, रतलाम
⚫ सुश्री वैशाली जैन, सीईओ, जिला पंचायत, रतलाम
ऑनलाइन होंगे यह

⚫ डॉ. सुषमा यादव, पूर्व UGC स्टीयरिंग समिति सदस्य, दिल्ली
⚫ डॉ. पवन मिश्रा, प्राध्यापक वाणिज्य, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश
⚫ डॉ. चाँद किरण सलूजा, प्रतिष्ठित विद्वान एवं शिक्षाविद, दिल्ली
⚫ डॉ. रीता सोनावत, प्राध्यापक एवं डीन (से. नि), SNDT विश्वविद्यालय, मुंबई (महाराष्ट्र)
⚫ डॉ. प्रदन्या करंदीकर, क्रीडा अधिकारी, सुभद्रा शर्मा शासकीय कन्या महाविद्यालय, गंजबासोदा, जिला विदिशा
⚫ डॉ. मीनल बुद्धिराजा, प्रतिष्ठित विद्वान एवं शिक्षाविद, स्वीडन
⚫ डॉ. मुनीरा हुसैन, पोषण विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, आहार एवं पोषण, माता जीजाबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इंदौर
⚫ डॉ अंशुल गुप्ते, VP PCI Pharma Services, USA
Hemant Bhatt