धर्म संस्कृति : आप खुश रहना चाहते है तो सबसे पहले "मैं" को छोड़ो, जहां "मैं" है वहां होती समस्या
⚫ डॉ. संयमलता मसा ने कहा
नीलेश बाफना
रतलाम, 12 जुलाई । आई वांट हैप्पीनेस, यदि आप खुश रहना चाहते है तो सबसे पहले आई "मैं " को छोड़ो, जँहा " मैं " है, मेरा है वँहा समस्या है। फिर वांट (चाहना) छोड़ो, किसी भी वस्तु की चाहत को छोड़ दो, चाहत कभी पूरी नही होती ।फिर बचेगा केवल हैप्पीनेस। बस यही है खुश रहने का फार्मूला ।
यह विचार नीमचौक स्थानक पर आयोजित धर्मसभा में महासती दक्षिण चन्द्रिका डॉ. संयमलता म.सा. ने व्यक्त करते आपने फरमाया की इस संसार के अंदर कौन सुखी है, आप सुखी है या दुखी है, हर व्यक्ति इस संसार में दुखी है कोई शारीरिक कोई मानसिक कोई आर्थिक रूप से दुखी है। इस संसार में एक व्यक्ति हँसता है तो दस व्यक्ति रोते हैं।
देवता भी मनुष्य जन्म के लिए तरसते
देवलोक के देवता भी मनुष्य जन्म पाने के लिए तरसते है। क्योंकि देवता वृति नहीं हो सकते है, वो त्याग नियम प्रत्याख्यान नही कर सकते है। मनुष्य क्षण में दुःख और क्षण में सुख महसुस करने लगता है। थोड़ी सी गर्मी लगी दुख थोड़ी सी हवा चली सुख। गरीब मंदिर के बाहर बैठकर माँगता है और अमीर मंदिर के अंदर माँगता है । निसंतान दुखी है, संतान वाला संतान के कारण दुखी है। गरीब शाम के भोजन की चिंता को लेकर परेशान है, अमीर अपने धन की सुरक्षा के कारण चिंतित है । जिसके पास सबकुछ है धन दौलत अच्छा परिवार वो इस कारण दुखी है की बीपी शुगर के कारण वो दो पैसे का नमक और दो पैसे की शक्कर तक नही खा पा रहा है । रूखा सूखा भोजन उसे मजबूरी में खाना पड़ रहा है। देख नही पाए तो दुखी, बोल नही पाए तो दुखी, सुन नही पाए तो दुखी, लकवा आदि बीमारी के कारण स्पर्श नही कर पाए तो दुःख। मतलब दुनिया में दुःख के हजार कारण है और पूरी दुनिया में घुम लो सब भौतिक साधन संसाधन जुटा हो लेकिन असली सुख आध्यात्मिक सुख है असली सुख मन के भीतर का सुख है मन को शांत करना असली सुख है।
105 महिलाओं के 35 ग्रुप्स ने की सहभागिता

श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय महासाध्वी डॉ.श्री संयम लताजी म.सा. डॉ. श्री अमित प्रज्ञाजी म.सा., डॉ. श्री कमलप्रज्ञाजी म.सा. श्री सौरभ प्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा -4 का आराधनामय चातुर्मास त्याग तपस्या के साथ नीमचौक स्तिथ जैन स्थानक में चल रहा है। धर्मसभा में जैन शोशयल ग्रुप रतलाम ग्रेटर के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित थे। दोपहर में महिलाओं के लिये नवकार मंत्र पर आधारित प्रश्नमंच का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 105 महिलाओं के 35 ग्रुप्स ने सहभागिता की कार्यक्रम का संचालन विनोद बाफना ने किया। आभार श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खमेसरा ने माना।
Hemant Bhatt