जनप्रतिनिधियों में आक्रोश : समस्याओं के निराकरण की मांग का ज्ञापन श्वान को देने का किया कार्य, पहले पहनाया हार
⚫ पशु प्रेमियों का कहना अधिकारियों के नाम ज्ञापन श्वान को देना, श्वान का ही है अपमान
⚫ श्वान तो होता है वफादार, ईमानदार, सामाजिक, कर्त्तव्यनिष्ठ, जिम्मेदार
⚫ शिकायतों को नहीं लिया जा रहा गंभीरता से
⚫ निर्माण कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार
⚫ कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं
हरमुद्दा
रतलाम, 1 जुलाई। जिले की धामनोद नगर पंचायत में मंगलवार को जनप्रतिनिधियों का जिम्मेदार अधिकारी प्रति ऐसा आक्रोश देखा गया कि उन्होंने समस्याओं की निराकरण की मांग का ज्ञापन श्वान को देने का कार्य किया मगर पशु प्रेमियों का कहना है कि यह तो श्वान का अपमान है। श्वान तो वफादार, ईमानदार, सामाजिक, कर्त्तव्यनिष्ठ, जिम्मेदार होता है। जिम्मेदार अधिकारियों का अपमान श्वान से करना ही श्वान का अपमान है।

अधिकारियों के नहीं मिलने पर श्वान को हार पहना कर दिया ज्ञापन
हुआ यूं कि मंगलवार को कार्यालयीन समय के दौरान नगर पंचायत कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे भाजपा कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद समस्याओं का ज्ञापन लेकर आए थे।
यह आए थे ज्ञापन लेकर
धामनोद नगर पंचायत कार्यालय के बाहर वार्ड क्रमांक 12 की भाजपा पार्षद सीमा सुरेश कटारा, वार्ड क्रमांक 10 की भाजपा की पार्षद पुष्पा राकेश मकवाना, कांग्रेस पार्षद मोहनलाल अमलियार, निर्दलीय पार्षद मुकेश चौधरी गांव के लोग भी शामिल थे।
लगाए मुर्दाबाद के नारे भी
सभी ने जमकर नारेबाजी की। मुरादाबाद के नारे भी लगाए। ज्ञापन देने गए तब जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे। जबकि मंगलवार को जनसुनवाई का दिन था।
श्वान की होती है सहज प्रवृत्तियां
जब पशु प्रेमियों को पता चला कि धामनोद नगर पंचायत में श्वान को ज्ञापन दिया गया तो उनका कहना था कि श्वान की कई सहज प्रवृत्तियाँ होती हैं, जो उनकी वंशावली और व्यक्तिगत अनुभव से प्रभावित होती हैं।
होती है प्रभावित करने वाली प्रवृत्तियां
कुछ प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं- शिकार प्रवृत्ति, सामाजिकता, खेलना, सुरक्षा, और मातृ प्रवृत्ति है।
सामाजिकता: श्वान सामाजिक प्राणी हैं और वे इंसानों और अन्य श्वानों के साथ मेलजोल करना पसंद करते हैं।
खेलना : श्वान खेलना पसंद करते हैं, और यह उनके लिए न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सामाजिक बंधन बनाने और कौशल सीखने का भी तरीका है।
सुरक्षा : श्वान अपने क्षेत्र और अपने परिवार की रक्षा करने की प्रवृत्ति रखते हैं, और वे अजनबियों या संभावित खतरों के प्रति सतर्क हो सकते हैं।
मातृ प्रवृत्ति : मादा श्वानों में अपने बच्चों की देखभाल करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है, और वे अपने पिल्लों को खिलाने, साफ करने और उनकी रक्षा करने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
मगर यह नहीं आते निष्ठावान नजर
इसके अलावा, श्वानों में अन्य सहज प्रवृत्तियाँ भी होती हैं, जैसे गंध लेने की क्षमता, भोजन की तलाश, और क्षेत्रीयता ये प्रवृत्तियाँ श्वान को जीवित रहने और अपने पर्यावरण में सफल होने में मदद करती हैं। जबकि जिम्मेदार अधिकारी किसी के भी प्रति निष्ठावान नजर नहीं आते हैं।
यह समस्याएं
जो ज्ञापन दिया है उसमें प्रधानमंत्री आवास योजना क्रियान्वयन, मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता में रखना, निकाय के उपयंत्री पर कानूनी कार्रवाई करवाने सहित कई समस्याओं की निराकरण की मांग की बात बताई गई।
होती जा रही है मूलभूत सुविधाएं ध्वस्त
मूलभूत सुविधा दिन-ब-दिन ध्वस्त होती जा रही है। प्रचार प्रसार के अभाव में शासन की योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे आम जन वंचित हो रहे हैं। निकाय के कई कर्मचारियों की विरुद्ध मिली शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। निर्माण कार्य में एजेंसी द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य में लापरवाही व भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिन पर कार्रवाई करने की बात की गई।
Hemant Bhatt