धर्म संस्कृति : आध्यात्मिक उत्साह और शुभ संकल्पों के साथ मनाया दीपावली उत्सव
⚫ दिव्य दर्शन भवन में हुआ आयोजन
⚫ आकर्षक रंगोली बनाकर किए दीप प्रज्वलित
हरमुद्दा
रतलाम, 21 अक्टूबर। डोंगरे नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ दिव्य दर्शन भवन में नववर्ष और नवयुग के स्वागत की खुशी में दीपावली का पावन पर्व बड़े ही आध्यात्मिक उत्साह और शुभ संकल्पों के साथ मनाया गया।

सभी ने सुंदर रंगोली के आसपास दीप प्रज्वलित कर नववर्ष और नवयुग के स्वागत का संदेश दिया तथा एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं।
यह थे अतिथि
कार्यक्रम में सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी गीता दीदी, राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी आरती दीदी, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय, सहकारी बैंक प्रबंधक दीपक राठौर तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक भ्राता पवन मिश्रा उपस्थित रहे। सभी ने अपने प्रेरक विचार साझा किए और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
लिया सभी ने संकल्प
कार्यक्रम में यह संकल्प भी कराया गया कि जीवन में शुभ भावनाओं और शुभ संकल्पों का दीप सदा प्रज्वलित रखें, जो केवल प्रकाश नहीं देता बल्कि सबके लिए दुआओं का स्रोत बनता है। साथ ही यह संदेश दिया गया कि पटाखों का प्रयोग न करें, क्योंकि यह प्रदूषण फैलाने वाले और प्रकृति को हानि पहुँचाने वाले होते हैं।
हर दिन को उत्साह उमंग से भरने की प्रेरणा देता है दीप उत्सव
दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि यह जीवन के हर दिन को प्रकाश, उत्साह और उमंग से भरने की प्रेरणा देता है। भगवान मनुष्य जीवन में “स्वराज” की प्रेरणा देते हैं — अर्थात अपने मन, विचारों और कर्मों पर स्वयं का नियंत्रण। जब हम अपने भीतर की दिव्य शक्तियों और गुणों को जागृत कर लेते हैं, तभी सच्चे अर्थों में “जागती ज्योति” बन पाते हैं। ऐसे आत्म-नियंत्रण से सम्पन्न व्यक्ति ही नई, सच्ची और सुखमय दुनिया के निर्माता बनते हैं।
⚫ ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, सेवा केंद्र संचालिका
आत्मिक जागरण का प्रतीक है दीपावली
परमात्मा हम आत्माओं के दीपक को जगाने आए हैं। जब आत्मा प्रकाशमान होती है, तो उसका उजाला दूसरों के जीवन को भी आलोकित करता है। दीपावली इस आत्मिक जागरण का प्रतीक है, जो हमें स्वर्णिम और श्रेष्ठ जीवन की ओर ले जाती है।
⚫ ब्रह्माकुमारी गीता दीदी, राजयोग शिक्षिका
लोभ और ईर्ष्या जैसे विकारों को मिटाने का पर्व है दीपावली
बाहरी और आंतरिक स्वच्छता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जैसे दीपावली से पहले घरों की सफाई होती है, वैसे ही हमें अपने मन की सफाई भी करनी चाहिए। नकारात्मकता, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसे विकार मन को अंधकारमय बना देते हैं। इन भावनाओं को मिटाकर ही हम सच्चे अर्थों में आनंदमय जीवन जी सकते हैं।
⚫ ब्रह्माकुमारी आरती दीदी, राजयोग शिक्षिका
हर हृदय में जलती रहे सद्भावना के दीप
ज्ञान और सद्भावना के दीप हर हृदय में जलते रहें, जिससे समाज में प्रेम, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैले।
⚫ पवन मिश्रा, प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक
Hemant Bhatt