धर्म संस्कृति : बच्चों में संस्कार के बीज डालों
⚫ डॉ. संयमलता म सा ने कहा
⚫ बालमुनि एवन्तमुनी और गौतम स्वामी की कथा का कराया श्रवण
हरमुद्दा
रतलाम, 26 अगस्त। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर आयोजित धर्मसभा मे दक्षिण चन्द्रिका डॉ. संयमलता म.सा. ने फरमाया की रतलाम वासियों की भक्ति अभूतपूर्व है। बालमुनि एवन्तामुनि एक राजकुमार थे। गौतम स्वामी गोचरी पर पधारे, तो वह नन्हा बालक मुनि की उँगली पकड़कर राजमहल में लेकर आए। राजा रानी मुनि गौतम स्वामी को सम्मुख देखकर बहुत प्रसन्न हुए। ये बालक के संस्कार थे जो उसे अपने माता पिता से मिले थे। आजकल के संस्कार बच्चा दादा को दद्दू कहते है। लोकी को कद्दू कहो तब तक कोई बात नही लेकिन दादा को दद्दू । फिर तो पापा को पप्पू कहोगे। मिठाई में घी नहीं तो मिठाई की शोभा नहीं नाम में अगर जी न हो तो नाम की शोभा नहीं। प्रेगनेंसी होती है डाक्टर बेड रेस्ट का बोल देता हो। माँ दिनभर बेड पर टीवी देखती रहती है। बच्चे को जन्म लेते ही आँख कमजोर चश्मा चढ़ जाता है ।
संस्कार मॉल में नहीं माहौल में मिलते
महासतिया जी ने फरमाया की घर के भीतर दिये हुए संस्कार आपकी संस्कृति का सूचक है। आपके दादा दादी माता पिता ने आपको ऐसे संस्कार दिये कि आप मंदिर में स्थानक में संत सती के दर्शन और प्रववन में आ रहे है लेकिन क्या आप अपने बच्चे को वो संस्कार दे रहे हो। बच्चा एक दिन स्कूल में नहीं जाए तो आपको चिंता हो जाती है की माक्र्स कम हो जाएगें लेकिन कभी आपने सोचा की एक दिन धार्मिक पाठशाला नही जाएगी तो संस्कार कम हो जाएंगे। संस्कार किसी मॉल में नही मिलेंगे, संस्कार अच्छे माहौल में मिलेंगे। आज की पीढ़ी मे टीवी माता इन्टरनेट पिता ओर गुगल गुरु और मोबाइल प्राण हो गया है।
संयम चरित्र पालन करके पाया मोक्ष
एवंता बालक गौतम स्वामी के साथ प्रभु महावीर के चरणो मे जाता है तो प्रभु महावीर उसे हितोपदेश देते है, नन्हा बालक प्रभु से कहता है मुझे भी दीक्षा लेना है। भगवान कहते है जैसा तुम्हे सुख लगे वैसा करो ओर माता पिता की आज्ञा लेकर आओ । माता पिता ने कहा की बेटा अभी तु बहुत छोटा है, लेकिन बालक ने कहा की जिसे में जानता हूं, उसे नही जानता हूं जिसे नाही जानता हूं उसे जानता हूं। मतलब मे ये तो जानता हुन कि मृत्यु निश्चित है लेकिन ये नहीं जानता हूं कि मत्यु कब आएगी । इस तरह कई बातो से अपने माता पिता को संतुष्ट करके बालक ने आज्ञा प्राप्त की ओर फिर बालक की दीक्षा हो गई। संयम चरित्र का पालन करके मोक्ष में स्थान प्राप्त किया।
नाटक का हुआ मंचन
प्रवचन के पश्चात सती सुभद्रा के जीवन पर आधारित नाटिका का मंचन हुआ। जिसमे प्रीति बोथरा, रीना गांधी, सोनू बाफना, महक कटारिया, सोनू बोथरा, ऋतु बाफना, प्रवीणा भटवेरा, ज्योति बोहरा आदि ने प्रस्तुति दी।
Hemant Bhatt