हाल हकीकत : सभी दूर लटके हुए मकड़ी के जाले, रेलिंग, कुर्सी टेबल फर्श पर जमी धूल, हो गया 6.48 करोड़ से निर्मित 20 कक्ष का लोकार्पण

हाल हकीकत : सभी दूर लटके हुए मकड़ी के जाले, रेलिंग, कुर्सी टेबल फर्श पर जमी धूल, हो गया 6.48 करोड़ से निर्मित 20 कक्ष का लोकार्पण

जिस कक्ष तक जाना था, वहां तक कारपेट

⚫ उस कक्ष की कुर्सी टेबल भी साफ सुथरी

⚫ बाकी अन्य कक्ष में दुर्दशा ही दुर्दशा

⚫ दरवाजों पर रंग के रेले, फर्श गंदा, कलर गिरा हुआ

⚫ शौर्य दिवस पर नजर आया अव्यवस्था का शौर्य

हरमुद्दा
रतलाम, 6 दिसंबर। स्थान : रतलाम का प्राचीन शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय परिसर

अवसर : प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में बने 20 कक्ष का लोकार्पण

दिन : शौर्य दिवस 6 दिसंबर

अतिथि : कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप एवं भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय।

अवसर लोकार्पण का, नजारे कुछ और

शनिवार को दोपहर में समारोह पूर्वक एक कक्ष का फीता काटकर लोकार्पण किया गया। बाकी कक्षों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। अतिथि सीढ़ियों से जाते तो उनका स्वागत दीवारों पर चारों तरफ लटके जालों, फर्श और रेलिंग पर जमी धूल से होता। लिफ्ट भी शुरू हुई। इसलिए अतिथि भी लिफ्ट से ही ऊपर गए।

दिखाएं हांडी के पके चावल

यदि अतिथि सभी कक्षाओं का भ्रमण करते तो उन्हें और भी बहुत कुछ नजर आता मगर जिम्मेदारों ने ऐसा नहीं किया, हांडी के पके चावल दिखा दिए। जबकि दूसरे कक्ष में लगी टेबल पर धूल की परत जमी हुई थी। दरवाजा पर भी जाले लटके हुए थे, भवन पर जो रंग रोगन किया गया, वह कलर दरवाजा पर रेले के रूप में साफ नजर आ रहा था। वहां पर जो मजदूर निवास कर रहे हैं उनके प्लास्टिक की डोरी कॉरिडोर में बंधी हुई थी। फर्श पर कलर गिरा हुआ था। क्लास रूम में लगने वाला बोर्ड झाड़ू के पास रखा हुआ था। एक कक्षा में बहुत सारा सामान रखा था जिसे कुर्सी और टेबल बनाई जाना है। अतिथि यदि कक्षों का भ्रमण करते तो उन्हें हल हकीकत पता चलती, नए भवन की व्यवस्था के नजारे नजर आते, मगर जिम्मेदारों ने उन्हें वही दिखाया, जो वे दिखाना चाहते थे। कुल मिलाकर अव्यवस्था का शौर्य नजर आया। जब जिम्मेदार पूरे भवन को साफ सुथरा लोकार्पण के अवसर पर नहीं रख पाए, वह बाद में क्या रखेंगे ? यह भली भांति सभी जान सकते हैं, चाहे विद्यार्थी हो या शहरवासी। मुद्दे की बात तो है कि मौजूद सैकड़ो लोगों ने भी नए भवन को देखना मुनासिब नहीं समझा। उनको तो भीड़ बढ़ाना और ताली बजाने से मतलब था, ताकि उनके ऊपर वाले उनको देख सके। जरूरत पड़ने पर नजर अंदाज न करें।

 परंपरा का निर्माण

अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। लोकार्पण फर्श से पर्दा हटाया। सुसज्जित कक्ष फीता काटकर लोकार्पण कर दिया। कक्ष के अंदर रखी हुई कुर्सी टेबल साफ सुथरी नजर आई। फर्श भी साफ था। कुछ भी हो लोकार्पण करवा लिया। पर दुख होता है शिक्षा के मंदिर का ऐसा हश्र होना।

मानने वाले और जानने वाले थे मौजूद

छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत किया गया। अतिथियों के साथ मंच पर प्राचार्य वाय के मिश्रा और जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष विनोद करमचंदानी मौजूद थे। अतिथियों के प्रशंसा में कसीदे कड़े गए। आयोजन में भाजपा को मानने वाले और जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष को करीब से जानने वाले मौजूद थे। 

प्रतिभाशाली सूरज को सम्मानित करते हुए अतिथि

विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले आकाश वसुनिया, सूरज सिंह, अमन सिंह पवार का अतिथियों के हाथों आयोजन में सम्मान किया गया। संचालन सीएल शर्मा ने किया। आभार अर्चना भट्ट ने माना।