धर्म संस्कृति : 201 जोड़ो के साथ हुआ भव्य सुंदरकांड पाठ

धर्म संस्कृति : 201 जोड़ो के साथ हुआ भव्य सुंदरकांड पाठ

सेवावीर परिवार रतलाम द्वारा 201वें मंगलवार को आयोजन

नन्हे बच्चों की प्रस्तुति ने मनमोहा

धर्म तथा प्रकृति का संरक्षण के उद्देश्य को लेकर करें मिट्टी के गणेश की स्थापना

हरमुद्दा
रतलाम, 8 जुलाई। सेवावीर परिवार द्वारा चलाए जा रहे प्रति मंगलवार हनुमान चालीसा पाठ अभियान के अंतर्गत इस मंगलवार को 201वें आयोजन में एक दिव्य और ऐतिहासिक सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें ढाई सौ से अधिक जोड़ों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, अनेक भक्त एकल रूप से भी शामिल हुए और आयोजन स्थल पर श्रद्धा एवं भक्ति का अनुपम वातावरण बना।

इस आयोजन को संगीत से सुसज्जित करने हेतु टीम परफॉर्मिंग आर्ट ने विशेष प्रस्तुति दी। जीतू नारायण व प्रसन्न परसाई की मधुर भजन गायकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्त स्वयं भजनों पर झूमने व नृत्य करने लगे। जितेंद्र चुंडावत,गोपाल कुमावत, विकास राव एवं शशांक यादव द्वारा वाद्य यंत्रों का शानदार संगत प्रस्तुत किया गया।

नन्हे बच्चों की प्रस्तुति ने मनमोहा

सेवावीर पाठशाला के नन्हें बच्चों द्वारा प्रस्तुत नित्यकर्म मंत्र, श्लोक एवं संस्कार , जिन्होंने अपनी मासूम आवाज़ से सभी श्रद्धालुओं का हृदय जीत लिया। संस्था ने समाज से अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों को इन सतत् चलने वाली पाठशालाओं में भेजें। यहाँ 3 वर्ष तक के बालक भी मंत्रों का अभ्यास कर रहे हैं – यह एक प्रेरणादायी पहल है।

धर्म तथा प्रकृति का संरक्षण के उद्देश्य को लेकर करें मिट्टी के गणेश की स्थापना

सेवावीर परिवार द्वारा चलाये जा रहे अभियान मेरे घर आएंगे मिट्टी के गणेश अभियान को सफल बनाने के लिए सभी भक्तों के माध्यम से समस्त नगर से आग्रह किया कि अपने घरों तथा मोहल्ले में लगने वाले पांडालों में मिट्टी के ही गणेश जी स्थापित करें जिसके माध्यम से धर्म तथा प्रकृति का संरक्षण किया जा सके।

भगवा दुपट्टा ओढ़ाकर किया सम्मानित

आयोजन में रतलाम नगर के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, धार्मिक प्रतिनिधि व राजनैतिक संगठन के सदस्य उपस्थित रहे। आयोजन की पूर्णता पर सभी सहयोगी सदस्य जिन्होंने अपनी सेवाएं दे कर आयोजन को सफल बनाया उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर, भगवा दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

अनुपम संगम

इस पावन आयोजन में सेवा, समर्पण और संस्कार का अनुपम संगम देखने को मिला – जो सेवावीर परिवार की सामूहिक साधना एवं संगठित श्रद्धा का परिणाम है।