धर्म संस्कृति : बंधु बेलड़ी आचार्यश्री सहित 45 से अधिक श्रमण श्रमणी वृंद का रतलाम में प्रवेशोत्सव

अयोध्यापुरम - सुमेरु नवकार तीर्थ प्रेरक बंधु बेलड़ी आचार्य श्री जिन-हेमचन्द्रसागर सूरीश्वर जी म.सा. कोई 20 श्रमणवृंद के साथ 1500 से अधिक किलोमीटर का पैदल विहार कर रतलाम पहुँचे।

धर्म संस्कृति :  बंधु बेलड़ी आचार्यश्री सहित 45 से अधिक श्रमण श्रमणी वृंद का रतलाम में प्रवेशोत्सव

रंगोली - गहुली सजाकर अक्षत से किया मंगल वधामणा

⚫ 1500 से अधिक किलोमीटर का पैदल विहार कर पहुँचे रतलाम

हरमुद्दा
रतलाम, 29 अप्रैल। अयोध्यापुरम - सुमेरु नवकार तीर्थ प्रेरक बंधु बेलड़ी आचार्य श्री जिन-हेमचन्द्रसागर सूरीश्वर जी म.सा. कोई 20 श्रमणवृंद के साथ 1500 से अधिक किलोमीटर का पैदल विहार कर रतलाम पहुँचे। आपके 6 वर्षो के बाद पदार्पण पर भव्य मंगल प्रवेशोत्सव मनाया गया। पूज्यश्री के साथ पांच आचार्यश्री- दो गणिवर्यश्री एवं 45 से अधिक श्रमण श्रमणी वृंद ने भी मंगल नगर प्रवेश किया।

प्रवेशोत्सव के पावन प्रसंग पर द्वार पर रंगोलियाँ तो मार्ग में जगह जगह गहुली सजाकर समाजजनों ने अक्षत से वधामणा किया। आचार्यश्री की निश्रा में रतलाम में 15 दिनी स्थिरता में अक्षय तृतीया पारणा, पन्यास पदवी, सागोद तीर्थ में 11 दिवसीय भव्य अंजन शलाका प्रतिष्ठा व दीक्षा महोत्सव सहित अन्य कार्यक्रम होंगे।

द्वार द्वार पर गुरु भगवन्तो के दर्शन-वन्दन

थावरिया बाजार स्थित कबीर सा.उपाश्रय से मंगल प्रवेशोत्सव चल समारोह की शुरुआत जयकारों, ढोल धमाके और गाजे-बाजे के साथ हुई। मार्ग में समाजजनों ने अपने अपने द्वार पर गुरु भगवन्तो के समक्ष गहुली करते हुए दर्शन वंदन किया। इस अवसर पर आचार्य श्री नयचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री प्रसन्नचन्द्रसागर सूरिजी म.सा,आचार्य श्री विरागचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री पदमचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री आनंदचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, गणिवर्य श्री तारकचन्द्रसागरजी म.सा. एवं गणिवर्य श्री अजितचन्द्रसागरजी म.सा. एवं साध्वी श्री अमीपूर्णाश्रीजी म.सा, साध्वी श्री अमीदर्शाश्रीजी म.सा.सहित सागर समुदाय के 45 से अधिक श्रमण श्रमणी वृंद का भी रतलाम में प्रवेश हुआ। चल समारोह खेरादीवास- चौमुखीपुल होकर हनुमान रूंडी पर पहुंचा।

वर्षीतप के 140 से अधिक तपस्वी का बहुमान

इस मौके पर श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ,गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेताम्बर पेढ़ी ने वर्षीतप के 140 से अधिक तपस्वी का बहुमान समारोह रखा। वर्षीतप तपस्वी मुनिराज श्री वीतरागचन्द्रसागर जी म.सा. एवं मुनिराज श्री तत्वरागचन्द्रसागर जी म.सा. ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया।व्यवस्थापक श्री पार्श्वनाथ जैन सेवा समिति ने बहुमान के लाभार्थी परिवारों के सहयोग से तपस्वी का श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर बहुमान किया। इन सभी का सामूहिक वर्षीत्पोत्सव 30 अप्रैल,बुधवार प्रात श्री शत्रुंजय तीर्थधाम करमदी पर होगा। इसके पूर्व विनोद मूणत परिवार द्वारा चल समारोह करमदी तीर्थ तक निकाला जायेगा। समाजजनों ने सभी तपस्वी की जयघोष और करतल ध्वनि के साथ तप अनुमोदना की। संचालन प्रदीप डांगी, विनोद मूणत एवं अशोक भाणावत ने किया।

एक मात्र जैन धर्म में वर्षीतप आराधना

यंहा आचार्य श्री जिन-हेमचन्द्रसागर सूरीश्वर जी म.सा. ने आशीर्वचन में कहा कि दुनिया में एक मात्र जैन धर्म में वर्षीतप की यह कठिन तप आराधना की जाती है। आत्म कल्याण और कर्म निर्झरा के लिए इस तप की अद्भुत महिमा है। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथजी ने 400 उपवास के बाद इसी पावन दिन ईक्षुरस से पारणा किया था। रतलाम सहित सम्पूर्ण मालवा अंचल में वर्षीतप को लेकर जबरजस्त उत्साह देखा गया है। अब अक्षय तृतीया पर सभी आराधकों के पारणे होने जा रहे है। रतलाम के सिद्धाचल तीर्थ पालीताणा से पौराणिक सम्बन्ध को उन्होंने ताजा किया। इस अवसर पर आचार्य श्री नयचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री प्रसन्नचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री विरागचन्द्रसागर सूरिजी म.सा, आचार्य श्री आनंदचन्द्रसागर सूरिजी म.सा.एवं गणिवर्य श्री अजितचन्द्रसागरजी म.सा. ने भी आशीर्वचन प्रदान किए।