मुद्दे की बात : एक शहर, दो शासकीय महाविद्यालय, एमकॉम की फीस एक में 1195 तो दूसरे में 3695 रुपए
⚫ गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं को चुकाने पड़ रहे हैं ढाई हजार रुपए अधिक
⚫ उच्च शिक्षा विभाग को लिखे गए कई पत्र, नहीं दिया अब तक ध्यान
⚫ इंफ्रास्ट्रक्चर भी है, पढ़ाने वाले प्रोफेसर भी हैं, जरूरत है तो सिर्फ एक आदेश भर की
⚫ वसूली गई अधिक राशि दी जाए छात्राओं को
⚫ उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त कार्यालय का फोन बंद
हरमुद्दा
रतलाम, 1 सितंबर। उच्च शिक्षा विभाग की क्या विडंबना है। रतलाम शहर में है दो शासकीय महाविद्यालय है, मगर एक में एम कॉम करने के लिए ढाई हजार रुपए अधिक जमा करवाना पड़ रहा है। संबंधित महाविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग से कई बार पत्र व्यवहार भी किया। मगर आज तक ध्यान नहीं दिया गया। गरीब विद्यार्थियों पर अधिक शुल्क की मार पड़ रही है। जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर भी है कॉलेज में पढ़ाने वाले प्राध्यापक भी हैं, देर है तो बस एक आदेश भर की। इसके साथ ही जिन छात्राओं से एम कॉम के लिए अधिक राशि ली गई है उसे वापस भी दी जाए यह बात छात्राओं ने कही है।

यहां पर बात हो रही है शासकीय कन्या महाविद्यालय की। यहां पर एम कॉम करने वाली गरीब और कमजोर वर्ग के साथ ही सामान्य वर्ग छात्राओं को ढाई हजार रुपए अधिक शुल्क भरना पड़ रहा है, जबकि स्वामी विवेकानंद शासकीय वाणिज्य महाविद्यालय में एम कॉम करने के लिए मात्र 1195 का शुल्क अदा कर रहे है, वही शासकीय कन्या महाविद्यालय में 3695 छात्राओं से लिए जा रहे हैं।
शासकीय कन्या महाविद्यालय में पढ़ने का खामियाजा
छात्राओं को यह राशि सिर्फ इसलिए देना पड़ रही है कि वह शासकीय वाणिज्य महाविद्यालय में पढ़ना नहीं चाहती, क्योंकि वह दूर है, जबकि गर्ल्स कॉलेज शहर के मध्य सुरक्षित स्थान पर है। मैजिक वाहन की सुविधा भी मिल जाती है जबकि वाणिज्य महाविद्यालय तरफ ऐसा कुछ नहीं है। स्वयं का दो पहिया वाहन हो तो ही उधर पढ़ने जा सकते हैं।
"बेटी पढ़ेगी विकास गढ़ेगी", लेकिन यहां पर तो आर्थिक बोझ
छात्राओं का कहना है कि यह सारा झमेला स्व वित्त योजना के तहत हो रहा है। महाविद्यालय में शासन की तरफ से एम कॉम की कक्षा शुरू करने की इजाजत नहीं है। इसलिए महाविद्यालय प्रशासन छात्राओं की सुविधा के लिए स्व वित्त योजना के तहत एम कॉम की कक्षा संचालित कर रहा है। इतना ही नहीं हमें पढ़ाने के लिए अलग से पढ़ाने वालों को नियुक्त किया है, जिन्हें महीने के 8-10 हजार रुपए दिए जाते हैं। यह वही राशि है जो कि छात्राओं से वसूल की जाती है। जबकि सरकार का कहना है "बेटी पढ़ेगी विकास गढ़ेगी", लेकिन यहां पर तो आर्थिक बोझ पड़ रहा है, पढ़ने के लिए। छात्राओं का कहना है कि सरकार व शासन को ध्यान देना चाहिए और जो राशि छात्रों से वसूली है उन्हें वापस दी जानी चाहिए।
कई सालों से है समस्या आर्थिक बोझ की
यह समस्या इस साल की नहीं है। काफी समय से यही चल रहा है। महाविद्यालय प्रशासन में कई बार उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेज कर एम कॉम के अध्यापन की सुविधा शुरू करने का निवेदन किया है, मगर विभाग ने आज तक ध्यान नहीं दिया।
कोई अतिरिक्त खर्च नहीं, बस आदेश की जरूरत
सरकार को इसके लिए कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा प्राध्यापक भी हैं जो कि अभी केवल बी कॉम तक की कक्षा को पढ़ा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। बस अधिकारियों की लापरवाही के चलते सैकड़ो छात्राओं को आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त कार्यालय का टेलीफोन ही बंद
जब इस संबंध में हरमुद्दा ने मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाही के कार्यालय में फोन लगाया तो लैंडलाइन फोन नंबर 07552554423 आउट ऑफ आर्डर मिला। चार दिन से यही समस्या है। विभाग की साइट पर भी उनके मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है।
जून में ही भेज दी गई थी जानकारी विभाग को
उच्च शिक्षा विभाग ने जून में ही शासकीय कन्या महाविद्यालय में पत्र भेजा था। जिसमें लिखा गया था कि यदि आप अपने महाविद्यालय में एमकॉम की नियमित कक्षा शुरू करवाना चाहते हैं तो गूगल फॉर्म भरकर भेजा जाए। हमने तत्काल ही जानकारी भरकर भेज दी थी। अभी तक इस सम्बंध में कोई आदेश नहीं आया है। आदेश का इंतजार है। आदेश मिलते ही एम कॉम की नियमित कक्षाएं शुरू हो जाएगी और विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं होगा।
⚫ डॉ. मंगलेश्वरी जोशी, प्राचार्य, शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम
मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और आयुक्त को लिखेंगे पत्र
शासकीय कन्या महाविद्यालय में एमकॉम की कक्षाएं शुरू करवाने को लेकर मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त को पत्र लिखा जाएगा। उनसे सतत संपर्क रखते हुए समस्या का समाधान करवाने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही जो राशि अब तक ली गई है, उसे पुनः छात्राओं को दिलवाएंगे।
⚫ दिनेश माल, प्रदेश संयोजक, भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा मध्य प्रदेश
Hemant Bhatt