मध्यप्रदेश फ़ार्मेसी काउंसिल के अव्यावहारिक निर्णयों का विरोध
⚫ मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने की निर्णयों के तत्काल निरस्तीकरण की मांग
हरमुद्दा
रतलाम, 04 दिसंबर। मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (एमपीसीडीए), जो प्रदेश के 41,000 केमिस्टों और लगभग 40,000 फ़ार्मासिस्टों का प्रतिनिधित्व करती है, ने मध्यप्रदेश फ़ार्मेसी काउंसिल द्वारा 10 सितंबर 2025 को लिए गए कई नीतिगत निर्णयों को अव्यावहारिक, एकतरफ़ा एवं हितविरोधी बताते हुए इन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
एमपीसीडीए के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार काउंसिल की बैठक में ‘भविष्य की कार्ययोजना’ प्रस्तुत की जानी थी, किंतु इसके स्थान पर बिना किसी पूर्व चर्चा, संवाद या हितधारकों की सलाह के, कई ऐसे प्रावधान पारित कर दिए गए जिनका सीधा नकारात्मक प्रभाव प्रदेश के लगभग 80,000 फ़ार्मासिस्टों पर पड़ेगा।
देश के अन्य राज्यों में भी प्रावधान लागू नहीं
जिला औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष जय छजलानी एवं सचिव अजय मेहता ने बताया कि एमपीसीडीए ने स्पष्ट कहा कि देश की किसी भी अन्य राज्य फ़ार्मेसी काउंसिल में ऐसे प्रावधान लागू नहीं हैं, इसलिए मध्यप्रदेश में इन्हें लागू करना उचित नहीं है।एमपीसीडीए ने जो प्रमुख आपत्तियाँ एवं समस्याएँ बताई है, उनके अनुसार समग्र पोर्टल से अनिवार्य इंटीग्रेशन-तकनीकी रूप से जटिल और अव्यावहारिक है। सभी दस्तावेजों का डिजी-लॉकर अपलोड अनिवार्य करने की प्रक्रिया अत्यधिक बोझिल है।
नवीनीकरण शुल्क ₹500 से बढ़ाकर ₹2500 करना- देश में सर्वाधिक होकर पूरी तरह अनुचित है । इसी प्रकार नवीनीकरण न होने पर पंजीकरण 31 मार्च को निरस्त करना-अत्यंत कठोर और गैर-न्यायसंगत है । विलंब शुल्क ₹2000 प्रतिवर्ष (अधिकतम ₹8000) भी असंगत एवं अत्यधिक है। 65 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए लाइफ सर्टिफिकेट और मेडिकल बोर्ड फिटनेस अनिवार्य करना भी वरिष्ठ फ़ार्मासिस्टों पर अनावश्यक बोझ है।
एमपीसीडीए के अनुसार प्रदेश में हजारों नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण एवं त्रुटि सुधार मामलों की फाइलें काउंसिल में लम्बे समय से लंबित हैं। दिसंबर 2025 में नवीनीकरण हेतु तैयार ‘अनुभव आधारित’ प्रकरण भी नई जटिलताओं के कारण प्रभावित होंगे। विडंबना है कि प्रधानमंत्री मोदी जी देशभर में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कार्यरत हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में फ़ार्मेसी काउंसिल इसके उलट पंजीकरण एवं नवीनीकरण को अनावश्यक रूप से जटिल बना रही है। एमपीसीडीए ने मांग की है कि नए प्रावधानों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए और सभी विवादित निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाए ताकि प्रदेश के फ़ार्मासिस्टों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और वे किसी कठोर कदम उठाने के लिए विवश न हों।
Hemant Bhatt