आंखों देखी :... हो गई इतिश्री, गिट्टी मिट्टी में रेंगते रहे दिव्यांग प्रतिभागी, जिम्मेदार करवाते रहे महापौर व कलेक्टर के साथ फोटोग्राफी

आंखों देखी :... हो गई इतिश्री, गिट्टी मिट्टी में रेंगते रहे दिव्यांग प्रतिभागी, जिम्मेदार करवाते रहे महापौर व कलेक्टर के साथ फोटोग्राफी

कौन विजेता रहा किसी को नहीं पता, खबर में किसी के नाम नहीं

⚫ सामाजिक न्याय विभाग ने किया प्रतिभाओं के साथ अन्याय

हरमुद्दा
रतलाम, 3 दिसंबर। विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांगजनों के लिए जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। खेल इस स्पर्धा में शामिल होने आए दिव्यांग प्रतिभागियों को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ा। गिट्टी मिट्टी में रहते रहे। उन्हें ट्राई साइकिल उपलब्ध नहीं हुई। महापौर और कलेक्टर के साथ फोटोग्राफी में जिम्मेदार व्यस्त रहे। कौन जीता और कौन हारा किसी को नहीं पता ? क्योंकि वह तो दिव्यांग थे, खबर में उनके नाम का उल्लेख ही नहीं। जिम्मेदारों ने दिव्यांगजनों की प्रतिभा के साथ अन्याय किया। उनके हौसलों को ध्वस्त कर दिया है।

बुधवार को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा जिला स्तरीय दिव्यांग खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन रतलाम के नेहरू स्टेडियम मैदान पर हुआ। शुभारंभ समारोह में महापौर प्रहलाद पटेल मौजूद रहे।

प्रतियोगिताओं में दिखाया उत्साह हुए विजेता मगर नहीं मिला नाम

बैसाखी रेस में प्रतिभागी

दिव्यांगजनों ने गोला फेंक, ट्राइसाइकल रेस, बैसाखी दौड़, मटकी फोड़, म्यूज़िकल चेयर्स जैसी प्रतियोगिताओं में जोश जुनून और उत्साह के साथ अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, मगर जिम्मेदारों ने विजेताओं के नाम तक नहीं दिए। विजेता प्रतियोगियों को सम्मानित करने के लिए कलेक्टर मिशा सिंह आई और उनका हौसला बढ़ाया। महापौर ने भी दिव्यांगजनों की हौसला अफजाई की।

इन्होंने भी नहीं दिखाई रुचि

आयोजन स्थल पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के रवि जैन को "हरमुद्दा डॉट कॉम" के संपादक ने निवेदन पूर्वक कहा था कि सभी विजेताओं के नाम और कितने प्रतिभागी शामिल हुए हैं, उनके आंकड़े भी दे दीजिएगा और उन्होंने आश्वस्त किया था कि हां बिल्कुल समापन के बाद पूरी जानकारी दे दी जाएगी, मगर वह भी देने में रुचि नहीं दिखाई।

हमारी मुसीबत और दर्द से किसी को सरोकार नहीं

प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए आलोट क्षेत्र से भी प्रतिभागी चार पहिया वाहन से आए थे। ट्राइसिकल रेस में शामिल होने के लिए आए मांगू सिंह दोपहर 1 बच कर 13 मिनट पर गिट्टी मिट्टी में रेंगते हुए पवेलियन की ओर जा रहे थे। हरमुद्दा से चर्चा में बताया कि वह ट्राई साइकिल रेस में शामिल होने के लिए आए हैं। मगर उन्हें अभी तक ट्राई साइकिल नहीं मिली है। इसलिए वह यहां पर भी गिट्टी मिट्टी में रहते हुए चल रहे हैं।  विभाग की ओर से उन्हें रोजगार से भी नहीं जोड़ा गया है, जबकि वे बीए पास है। 34 वर्षीय मांगू सिंह को सरकारी नौकरी की आस है, फिलहाल तो वह बच्चों को कोचिंग देकर गुजारा कर रहे हैं। इसी तरह सद्दाम पाउच बेचकर अपना गुजारा कर रहे हैं, वही 40 वर्षीय पूरा लाल कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। इनका कहना है कि ₹600 दिव्यांगता पेंशन मिलती है मगर उससे क्या होगा? मुकेश चौहान ने बताया कि हमारी मुसीबत और दर्द से, लगता है किसी को सरोकार नहीं है। हमें गरीबी ने विकलांग नहीं बनाया है, विकलांगता ने हमें मजबूर कर दिया है हाथ फैलाने के लिए। बस दिव्यांगजन नाम मिला है, सम्मान और इज्जत की रोटी नहीं।

जिम्मेदार उत्थान की बजाय कर रहे पतन दिव्यांगजनों का

आयोजन स्थल पर मौजूद समाजसेवी का कहना था कि शासन द्वारा पूरा विभाग है, इनके उत्थान के लिए मगर लगता है जिम्मेदारों में उनके प्रति कोई निष्ठा या लगन नहीं है, ताकि इनका कुछ हो सके। ऊपर वाले ने तो उनके साथ जो किया, वह किया, मगर जिनके हाथों में जिनके उत्थान की पूरी-पूरी संभावना है वे न जाने क्यों इनके और पतन का कारण बने हुए हैं। इनकी पीड़ा, भावना, तकलीफ, खुशी, गम को समझने के लिए जिम्मेदारों में इंसानियत की जरूरत है। शासन ने जिस ओहदे पर बिठाया है, उसका सम्मान करते हुए निष्ठा के साथ इन्हें करना ही चाहिए। अब संवेदनशील कलेक्टर और सीईओ मैडम आए हैं, हो सकता है अब भला हो जाए इन दिव्यांग जनों का।

महापौर और कलेक्टर के साथ फोटोग्राफी में मशगूल जिम्मेदार

विभाग के जिम्मेदार आला अफसर तो महापौर और कलेक्टर के साथ फोटोग्राफी करवाने में ही मशगूल रहे। दिव्यांगजनों के साथ क्या फजीहत हो रही है, इनका कोई लेना-देना नहीं। बस एक दिन था, जो मना लिया गया। जो फंड आया था, उसे कितना खर्च किया, यह तो वही जाने।