सड़कों से नदारद रतलाम यातायात पुलिस : सड़कों और चौराहे पर जाम, रोज रेंगती जिंदगी
आंकड़ों की बाजीगरी में भले ही यातायात विभाग 'कम शिकायतों' के साथ राहत की सांस ले रहा हो, लेकिन रतलाम की जनता हर रोज सड़कों पर जाम की सजा भुगत रही है। जब तक यातायात अमला फाइलों से बाहर निकलकर चौराहों पर मुस्तैद नहीं होगा, तब तक यह राहत केवल कागजों तक ही सीमित रहेगी।
⚫ 9 महीने में 'सिर्फ 18 शिकायतें' उठाती हैं बड़े सवाल!
⚫ रतलाम का यातायात थाना ही शहर से 5 किलोमीटर दूर
हरमुद्दा
रतलाम, 16 अक्टूबर। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। प्रमुख चौराहों पर हर रोज लगने वाला भीषण जाम आमजन के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। अमला धरातल पर दिखाई नहीं देता, फिर भी पुलिस प्रशासन द्वारा जारी हालिया आंकड़ों में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM हेल्पलाइन) के 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस 9 महीने की अवधि में यातायात थाने से जुड़ी महज 18 शिकायतें ही दर्ज हुई हैं! शहर की भयावह मैदानी हकीकत और सरकारी फाइलों में दर्ज इन 18 शिकायतों के भारी अंतर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मैदानी हकीकत: जाम से बेहाल सड़कें, नदारद पुलिस
शहर का शायद ही कोई ऐसा मुख्य मार्ग या चौराहा हो जहाँ लोग रोजाना घंटों ट्रैफिक जाम में न फंसते हों।
बदहाल चौराहे: दो बत्ती, चांदनी चौक, तोपखाना बाजना बस स्टैंड, गौशाला रोड, शहर सराय धान मंडी, माणक चौक दौलतगंज, स्टेशन रोड और लोकेंद्र टॉकीज चौराहा, श्री राम मंदिर कस्तूरबा नगर, हाट की चौकी आबकारी चौराहा, रानी जी का मंदिर हरदेव लाल की पीपली गणेश देवी चौमुखी पुल, नोलाई पूरा, घास बाजार, जैसे व्यस्ततम इलाकों में गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं।

अनुपस्थित अमला: चौराहों से यातायात कर्मी अक्सर नदारद रहते हैं। जहां जाम खुलवाने के लिए पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए, वहां नागरिक खुद ही गाड़ियां हटाने और रास्ता बनाने को मजबूर दिखते हैं।
अतिक्रमण और अवैध पार्किंग
नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहन और सड़कों तक पसरा अतिक्रमण समस्या को और विकराल बना रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति दिखाई देती है।
आंकड़े बनाम हकीकत: 9 महीने में सिर्फ 18 शिकायतें क्यों?
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले भर में 6,583 शिकायतें मिलीं, जिनमें से अन्य थानों में सैकड़ों की संख्या में मामले दर्ज हुए (जैसे स्टेशन रोड पर 745 और औद्योगिक क्षेत्र में 629)। लेकिन पूरे शहर की यातायात व्यवस्था संभालने वाले यातायात थाने के खाते में 9 महीने में केवल 18 शिकायतें ही आईं। आंकड़ों की खुशी में यातायात डीएसपी और थाना प्रभारी मस्त हैं। सड़क पर वाहन चलाने वाले त्रस्त हैं।

यह विरोधाभास कई बड़े सवाल खड़े करता है
क्या जनता का भरोसा उठ चुका है? रोज जाम की मार झेल रही जनता शायद यह मान चुकी है कि CM हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बाद भी ट्रैफिक व्यवस्था में कोई जमीनी सुधार नहीं होने वाला।
जागरूकता का अभाव या जटिल प्रक्रिया?
⚫ क्या आम नागरिक ट्रैफिक जाम जैसी दैनिक समस्याओं के लिए CM हेल्पलाइन का रुख ही नहीं कर पा रहे हैं?
⚫ फाइलों में 'ऑल ओके', सड़कों पर 'ब्लॉक': जब शिकायतों का आंकड़ा इतना कम दिखता है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारी यह मान बैठते हैं कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बिल्कुल ठीक चल रही है?
आमजन की मांग: कागजी समीक्षा नहीं, चाहिए मैदानी मुस्तैदी
जिला पुलिस कप्तान द्वारा शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान की मंशा सराहनीय है, लेकिन यातायात विभाग को लेकर अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है। रतलाम के नागरिकों का कहना है कि यातायात पुलिस कर्मियों को केवल चालानी कार्रवाई या खानापूर्ति तक सीमित न रखकर प्रमुख चौराहों पर तैनात किया जाए। व्यस्त समय (Peak Hours) में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई हो।
यातायात थाना ही शहर से 5 किलोमीटर दूर
ट्रैफिक हेल्पलाइन या कंट्रोल रूम को ऐसा बनाया जाए कि जाम की सूचना मिलते ही 5 से 10 मिनट के भीतर बल मौके पर पहुंचे। मगर रतलाम में ऐसा संभव है नहीं जिम्मेदारों ने यातायात थाना ही शहर से 5 किलोमीटर दूर बनाया है तो क्या खाक शिकायत करने जाएंगे। आईएएस और आईपीएस अधिकारी थोड़ा भी चिंतन करते तो पुराने एसपी ऑफिस में यातायात थाना लगा सकते थे मगर ऐसा नहीं हुआ। बजट जो पूरा करना था, भले ही जाता है थाना शहर से दूर ही क्यों ना हो।
मुद्दे की बात

आंकड़ों की बाजीगरी में भले ही यातायात विभाग 'कम शिकायतों' के साथ राहत की सांस ले रहा हो, लेकिन रतलाम की जनता हर रोज सड़कों पर जाम की सजा भुगत रही है। जब तक यातायात अमला फाइलों से बाहर निकलकर चौराहों पर मुस्तैद नहीं होगा, तब तक यह राहत केवल कागजों तक ही सीमित रहेगी। रतलाम नगर निगम का यातायात अमला भी केवल वसूली में लगा हुआ है। रोज शाम को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के निवास और कार्यालय के बाहर वीसाजी मेंशन के बाहर नगर निगम यातायात विभाग का वाहन खड़ा रहता है। आधे घण्टे तक चाय नाश्ता होती है। इस दौरान वहां पर यातायात जाम होता रहता है, मगर उनको कोई लेना देना नहीं। बतौर सबूत सीसीटीवी फुटेज देख सकते हैं। मंत्री निवास सहित आसपास की दुकानों पर भी कैमरे लगे हुए हैं।
फोटो : लगन शर्मा
Hemant Bhatt