प्रासंगिक : अब लड़ाई नहीं

प्रासंगिक : अब लड़ाई नहीं

आशीष दशोत्तर

चाहते हैं यहां सब लड़ाई नहीं ,
पर हुई है भला कब लड़ाई नहीं ?

है मुहब्बत में तक़रार की लज़्जतें ,
हर लड़ाई का मतलब लड़ाई नहीं ।

आंच आई उसूलों पे तब ही लड़े ,
लोग करते हैं जब-तब लड़ाई नहीं ।

अम्न और चैन चाहता है सारा जहां ,
है किसी का भी मज़हब लड़ाई नहीं ।

आ चुके हैं सभी लोग आज़िज़ यहां ,
और हो अब तो या-रब लड़ाई नहीं ।

होंठ खोलूं तो बिखरे मुहब्बत सदा ,
बोलते हैं मेरे लब , लड़ाई नहीं ।

हाथ आता है 'आशीष' कुछ भी कहां ,
जान लें और करें , अब लड़ाई नहीं। 

⚫ आशीष दशोत्तर
     रतलाम 
     9827084966