सामाजिक सरोकार : मालवा के सबसे बड़े निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म में 1600 से अधिक ने किया नौ पीढ़ियों का श्राद्ध-तर्पण
⚫ गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के भी पहुंचे परिजन
हरमुद्दा
रतलाम, 21 सितंबर। सर्वपितृ अमावस्या पर मालवा अंचल के सबसे बड़े निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म में एक साथ 1600 से अधिक श्राद्धकर्ताओं ने विधिविधान के साथ श्राद्ध-तर्पण किया। कोई ढाई घंटे से अधिक समय तक चले इस आयोजन में श्राद्धकर्ताओं ने अपने परिवार की नौ पीढ़ियों सहित दिवंगत शिक्षकों, मित्रों और स्नेहीजनों सहित ज्ञात-अज्ञात समस्त जीवों का भावभीना स्मरण करते हुए उन्हें तृप्त किया। इस बार गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु यंहा पहुंचे थे।

चरण पादुका के दर्शन से विधान प्रारम्भ
संत श्री आसाराम जी बापू की सतप्रेरणा से श्री योग वेदांत सेवा समिति,युवा सेवा संघ,महिला उत्थान मंडल एवं मांगल्य मन्दिर धर्म क्षेत्र रतलाम द्वारा संतश्री वाटिका चंपा विहार सागोद रोड पर सामूहिक श्राद्धकर्म संपन्न हुआ। मुख्य यजमान राजेश कुमावत , अधीक्षक जिला डाकघर रहे। श्राद्धकर्म एवं तर्पण की सम्पूर्ण क्रिया जगन्नाथपुरी के विद्वान ब्राहमण पंडित श्री शारदाप्रसाद मिश्रा ने संयमी ब्राह्मणों श्री शिवशंकर दुबे,पं.चेतन शर्मा एवं पं. सोमेश शर्मा के सहयोग से करवाई। जिनका समिति अध्यक्ष प्रेम प्रकाश बाथव एवं रामचंद्र चौधरी ने स्वागत किया। आयोजन समिति द्वारा सम्पूर्ण सामग्री निशुल्क उपलब्ध करवाई गई थी। कार्य्रकम के आरम्भ में पूज्य गुरुदेव की चरण पादुका को चल समारोह के साथ लोकेश परिहार परिवार द्वारा लाया गया। श्रीमती सुरेका परिहार द्वारा उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में जगन्नाथ पुरी से विशेष तौर से लाया गया छत्र अर्पित किया गया। चरण पादुका के दर्शन -वन्दन कर विधान की शुरुआत की गईा समाजसेवी सुरेश तंवर का 3500 से अधिक लावारिसों का अंतिम संस्कार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन सहित सम्पूर्ण क्रिया करने पर अभिनन्दन किया गया। श्राद्धकर्ताओं को दीपावली पूजन के लिए कुबेर की पोटली सहित अन्य उपहार निशुल्क प्रदान किये गये। रतलाम जिले के अलावा मंदसौर, नीमच, धार सहित पुणे, लखनऊ,भावनगर से भी नागरिक ने श्राद्ध करने आये थे।
पवित्र वातावरण में तर्पण - श्राद्धकर्म
सर्वप्रथम विधिविधान के साथ 1600 से अधिक श्राद्धकर्ताओं ने तीन - तीन पीढियों में दिवंगत परिजनों का दोनों हाथ ऊपर उठाने के बाद मंत्रोच्चार के साथ तर्पण किया। इसके बाद श्राद्धकर्म करवाते हुए पूर्वजों से घर परिवार में सुख-समृधि और आरोग्य की प्रार्थना की गई। यंहा भी नौ पीढ़ियों का पिंडदान करवाया गया। जिनमे पिता के पक्ष से तीन,माता के पक्ष से तीन तथा ननिहाल पक्ष की तीन पीढियां शामिल रही।बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने दिवंगत परिजनों का स्मरण किया और उनकी आँखे नम हो गई। परिजनों के साथ साथ शिक्षा प्रदान करने वाले गुरुजनों, मित्रों, स्नेहीजनों के साथ जिनकी किसी हादसे में अकाल मौत हो गई है, उनका भी श्राद्धकर्म करवाया गया। मध्याह्न के समय पवित्र धुप और दीप के वातावरण में पिंडदान किया गया। विधि के पहले पितृजनों को आमन्त्रण और उपरांत नतमस्तक होकर उन्हें विदाई दी गई। इस विशिष्ट आयोजन के लिए संतश्री वाटिका चंपा विहार में कामधेनु गौशाला स्थित गौमंदिर से लायी गई स्वर्ण कपिला गौ का सभी दर्शन किया। यंहा गौमाता की पावन रजमिश्रित मिटटी से लेपन मंत्रोचार के साथ शुद्धिकरण की क्रिया करवाई गई थी। आयोजन को सफल बनाने के लिए विगत एक पखवाड़े से समिति के 200 से अधिक स्वयं सेवक तैयरियों में जुटे थे। कोई 1500 ऑनलाइन पंजीयन के अतिरिक्त करीब 100 नागरिक सीधे भी श्राद्ध कर्म करने के लिए पहुंचे थे।
देवताओं के पूर्व पितृजनों को करते तृप्त
सर्वपितृ अमावस्या पर सामूहिक श्राद्धकर्म की महिमा बतलाते हुए पं. शारदाप्रसाद मिश्रा ने बताया कि हमारे शास्त्रों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि देवताओं के पूर्व पितृजनों कोप्रसन्न -तृप्त करना आवश्यक है, जिसके लिए श्राद्ध पक्ष का विधान किया गया है। सर्वपितृ अमावस पर दिवंगत जनों का सामूहिक श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। ऐसा नही करने पर बड़ा दोष लगता है। श्राद्ध के दिन हम अपने पितृजनों को जो भी अर्पण करते है, वह उन तक पहुंचता है। जिससे तृप्त होकर वे परिवार पर आशीर्वाद बरसाते है। जिससे वंश में सुख, समृद्धि और उन्नति होती है। यह दिव्य परम्परा दुनिया में केवल सनातन वैदिक संस्कृति में ही जंहा परिजनों का दिवंगत होने के बाद भी स्मरण करते हुए विधिविधान से श्राद्धकर्म किया जाता है।सामूहिक श्राद्ध सामाजिक समरसता और धर्म के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है। कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र जादौन ने किया। आभार रुपेश सालवी ने माना।
Hemant Bhatt